अधिवक्ता डीपी शर्मा ने बताया कि धारा 169 के तहत जीएसटी अफसरों का दायित्व है कि वह आदेश की सूचना संबंधित व्यक्ति को देते हुए उसे सुनवाई का अवसर दें, लेकिन मौजूदा मामले में अपीलेट ऑथरिटी ने प्रार्थी फर्म के खिलाफ कंप्यूटराइज्ड फॉर्म में और बिना मस्तिष्क का उपयोग किए आदेश दिया है, जो अवैधानिक है। इसके अलावा मामले में प्रार्थी को सुनवाई का मौका भी नहीं दिया है। इसलिए अपीलेट ऑथरिटी का आदेश निरस्त कर मामले में विधिक प्रावधानों पर नए सिरे से आदेश दिया जाए। वहीं खंडपीठ ने ऐसे ही समान अन्य मामले में भी आदेश पारित किया है। इस मामले में भी दिशा-निर्देश जारी किए जाए। जिस पर खंडपीठ ने मामले में सुनवाई कर अपीलेट ऑथरिटी को कहा है कि वह दोनों पक्षों को सुनकर विधिक प्रक्रियानुसार निस्तारण करे।