बताते चलें कि अनुसेवकों की बहाली विज्ञापन में त्रुटि पाए जाने पर सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर झारखंड सरकार ने पलामू के 251 अनुसेवकों को सेवा से बर्खास्त कर दिया है।
हवन सह धरना कार्यक्रम में इंदर सिंह नामधारी ने कहा कि बर्खास्त अनुेसवक लंबे समय से आन्दोलन कर रहे हैं। सरकार को मामले में संज्ञान लेना चाहिए और समायोजन की प्रक्रिया शुरू करनी चाहिए।
पूर्व मंत्री केएन त्रिपाठी ने भी अनुसेवकों के आन्दोलन को जायज ठहराते हुए झारखंड के मुख्यमंत्री से अविलंब छतीसगढ की तर्ज पर समायोजन की वकालत की।
इससे पहले रैली निकाल कर बर्खास्त अनुसेवक समाहरणालय गेट पर पहुंचे और धरना दिया। यहां पुरोहित के नेतृत्व में वैदिक मंत्रोच्चारण करते हुए हवन किया गया।
मौके पर बर्खास्त अनुसेवकों ने कहा कि इसके बाद भी उनकी मांग पूरी नहीं होती है तो सारे अनुसेवक पलामू से भिक्षाटन करते हुए रांची तक पैदल मार्च करेंगे। मुख्यमंत्री को मांग पत्र सौंपा जायेगा। उन्होंने बिना शर्त समायोजित करने की मांग की।