प्रो. प्रेम कुमार धूमल ने साहित्यकार यशपाल को याद करते हुए कहा कि वे हिन्दी साहित्य के विशिष्ट स्तम्भ, एक क्रांतिकारी युवा, समाजवादी विचारक और विस्तृत विधाओं में लेखन करने वाले लेखक थे। उन्हें साहित्य जगत में उनके योगदान के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार तथा पद्म भूषण से सम्मानित किया गया।
प्रो. धूमल ने कहा कि उनके साहित्य का वैश्विक पाठक-वर्ग तक पहुँचाना और भाषा की सीमा पार करना उनके सुपुत्र आनंद यशपाल की महत्वपूर्ण पहल रही है। आनंद ने अपने पिता के अंग्रेज़ी में अनूदित संस्करणों और सम्पादन कार्यों के माध्यम से यशपाल की कहानियाँ व उपन्यास अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तुत किए, जिसमें This Is Not That Dawn (“झूठा सच” का अनुवाद) का प्रकाशन भी शामिल है।
आनंद यशपाल ने इस मौके पर कहा कि वे अपने पिता की याद और साहित्यिक विरासत को संजो कर रखने के लिए निरन्तर प्रयासरत रहेंगे और भारत में साहित्यिक विमर्श को प्रोत्साहित करने के लिये आगे भी सक्रिय रहेंगे।