जयपुर, 27 दिसंबर । राजस्थान हाईकोर्ट ने पेंशन नियमों के विपरीत जाकर राज्यपाल की बजाय माध्यमिक शिक्षा निदेशक की ओर से रिटायर प्रिंसिपल की पेंशन का का कुछ हिस्सा रोकने पर प्रमुख शिक्षा सचिव, माध्यमिक शिक्षा निदेशक और पेंशन निदेशक सहित मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी, सवाई माधोपुर से जवाब तलब किया है। जस्टिस अशोक कुमार जैन की एकलपीठ ने यह आदेश कमलेश कुमार जोशी की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए।
याचिका में अधिवक्ता विजय पाठक ने बताया कि याचिकाकर्ता प्रिंसिपल पद से 31 मई 2021 को रिटायर हुआ, लेकिन पूर्व की विभागीय जांच के लंबित होने के कारण माध्यमिक शिक्षा निदेशक ने उसकी दस फीसदी पेंशन रोकने का दंडादेश दिया। इसे हाईकोर्ट में चुनौती देते हुए कहा कि वह बामनवास में ब्लॉक प्रारंभिक शिक्षा अधिकारी के तौर पर अक्टूबर 2014 से जून 2015 तक कार्यरत रहा। उस दौरान कार्यालय के अधीन कुछ अधिकारियों व कर्मचारियों की मिलीभगत से तीन-चार साल दिसंबर 2009 से पोषाहार में गबन हो रहा था। इसकी जानकारी मिलने पर याचिकाकर्ता ने तत्काल बामनवास थाने में एफआईआर दर्ज कराई। इससे विभाग को पैसा वापस मिला। वहीं जिला परिषद सवाई माधोपुर और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक की जांच में प्रार्थी को दोषमुक्त किया और दोषी अफसर व कर्मचारियों पर कार्रवाई हुई। इसके बावजूद विभाग ने प्रार्थी को सीसीए नियमों में चार्जशीट दी, जिसका याचिकाकर्ता ने जवाब दे दिया। इस दौरान उसके रिटायर होने पर भी जांच जारी रखी और 17 दिसंबर 2024 को माध्यमिक शिक्षा निदेशक ने आदेश जारी कर उसकी दस फीसदी पेंशन रोक ली। याचिका में कहा गया कि याचिकाकर्ता राज्य सेवा के अधिकारी के तौर पर रिटायर हुआ था और राजस्थान पेंशन नियमों के अनुसार केवल राज्यपाल राज्य सेवा के अधिकारी के खिलाफ दंडादेश जारी कर सकते हैं। इसलिए माध्यमिक शिक्षा निदेशक के आदेश को रद्द किया जाए। जिस पर सुनवाई करते हुए एकलपीठ ने संबंधित अधिकारियों से जवाब तलब किया है।