जींद : आर्य समाज दक्षिण अफ्रीका का प्रतिनिधिमंडल पहुंचा खटकड़

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स्वामी आदित्यवेश व उनकी टीम ने प्रतिनिधि मंडल का पगड़ी, शॉल, अंगवस्त्र और वैदिक साहित्य भेंट कर पारंपरिक रूप से स्वागत किया। उन्होंने कहा कि यह मुलाकात न केवल आत्मीयता का प्रतीक है बल्कि विश्वभर में वैदिक संस्कृति के पुनर्जागरण की दिशा में एक प्रेरणादायक कदम है। इस अवसर पर आर्य प्रतिनिधि सभा दक्षिण अफ्रीका के अध्यक्ष पंडित किरण सतगुर ने कहा कि हमारे पूर्वज लगभग 150 वर्ष पूर्व अंग्रेजों द्वारा बंधुआ मजदूर बना कर दक्षिण अफ्रीका ले जाए गए थे। कठिन परिस्थितियों में भी उन्होंने धर्म और संस्कृति को जीवित रखा। आज अपनी मातृभूमि भारत में आकर हृदय गौरव से भर गया है। दक्षिण अफ्रीका में धर्मगुरु स्वामी वेदानंद सरस्वती ने कहा कि आर्य समाज विश्वभर में मनुर्भव (श्रेष्ठ मानव बनो) का संदेश फैला कर जाति, भाषा और देश के भेदभाव से ऊपर उठ कर मानवता की भावना को सशक्त बना रहा है। प्रतिनिधि मंडल के सदस्य डा. विश्राम रामविलास ने बताया कि दक्षिण अफ्रीका सहित अनेक देशों में वैदिक धर्म और आर्य समाज का प्रचार हिंदी और संस्कृत के माध्यम से निरंतर किया जा रहा है।

प्रतिनिधि मंडल ने स्वामी आदित्यवेश को दक्षिण अफ्रीका आने का आमंत्रण दिया ताकि वहां आर्य समाज के कार्यों और वैदिक शिक्षा के प्रसार को नई दिशा मिल सके। कार्यक्रम के अंत में सार्वदेशिक आर्य युवक परिषद के राष्ट्रीय महासचिव स्वामी आदित्यवेश ने कहा कि भारतीय संस्कृति की जड़ें अत्यंत गहरी हैं। यह देखकर गर्व होता है कि हजारों किलोमीटर दूर रह रहे भारतीय वंशज आज भी वेदों और वैदिक मूल्यों से जुड़े हुए हैं।