अपील में अधिवक्ता देवकृष्ण पुरोहित ने अधिकरण को बताया कि उसका साल 1996 में आरएएस पद पर चयन किया गया था। वहीं फरवरी, 2020 को उसे राजस्व मंडल, अजमेर में सदस्य पद पर नियुक्त किया गया। जून, 2021 को अपीलार्थी के खिलाफ एसीबी ने भ्रष्टाचार का मामला दर्ज किया और उसे गिरफ्तार किया गया। वहीं 48 घंटे अभिरक्षा में रखने के चलते उसे निलंबित कर दिया गया। हालांकि जून, 2023 को वह बहाल हो गया। अपील में कहा गया कि राज्य सरकार की ओर से एक अप्रैल, 2021 की जारी वरिष्ठता सूची में वह 18वें नंबर पर था। इस वरिष्ठता सूची के आधार पर साल 2021-22 की रिक्तियों के विरुद्ध हायर सुपर टाइम स्केल में पदोन्नति आदेश जारी किया गया, लेकिन अपीलार्थी को लेकर डीपीसी की अभिशंषा को सीलबंद लिफाफे में रखा गया। अपील में बताया गया कि प्रकरण में उसके खिलाफ चालान और अभियोजन स्वीकृति जारी होने के बाद एसीबी कोर्ट में मामला लंबित है। कार्मिक विभाग के साल 2008 के परिपत्र के तहत निलंबन से बहाल होने पर अधिकारी पदोन्नति का अधिकारी होता है। इस परिपत्र के आधार पर दो आईएएस अफसरों को भी आपराधिक मामला लंबित होने के बावजूद पदोन्नति दी गई है। ऐसे में अपीलार्थी को पदोन्नति नहीं देना गलत है। जिसका विरोध करते हुए सरकारी वकील ने कहा कि मामला एसीबी कोर्ट में लंबित है। कोर्ट का फैसला होने के बाद ही लिफाफा खोला जा सकता है। दोनों पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने अपीलार्थी का लिफाफा खोलने के आदेश दिए हैं।