अपात्रों को शिक्षक पद पर नियुक्ति देने पर रोक, मांगा जवाब

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याचिका में अधिवक्ता विश्वास शर्मा ने अदालत को बताया कि राज्य सरकार ने 31 दिसंबर, 2021 को प्राइमरी और अपर प्राइमरी शिक्षकों के लिए भर्ती विज्ञापन जारी किया। जिसमें अनिवार्य शर्त रखी गई कि अभ्यर्थी के पास प्राथमिक शिक्षा में दो साल का डिप्लोमा होना जरूरी है। याचिका में कहा गया कि पात्रता संबंधी विवाद को पूर्व में हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी। जिसे हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया था। वहीं इसके खिलाफ खंडपीठ में पेश अपील और सुप्रीम कोर्ट में दायर एसएलपी भी खारिज हो गई थी। ऐसे में यह पूर्व में ही तय हो चुका है कि तृतीय श्रेणी शिक्षक भर्ती के लिए दो साल का बीएसटीसी डिप्लोमा होना जरूरी है। याचिका में कहा गया कि राज्य सरकार अब एक साल का प्रमाण पत्र रखने वाले अभ्यर्थियों को इस पद पर नियुक्त कर रही है। जबकि उनके पास दो साल की अवधि का बीएसटीसी डिप्लोमा भी नहीं है। जिसके चलते याचिकाकर्ता के हित प्रभावित हो रहे हैं। जिस पर सुनवाई करते हुए अदालत ने कहा कि राज्य सरकार भर्ती विज्ञापन की शर्त में तय पात्रता की पालना सुनिश्चित करे और किसी भी अपात्र की भर्ती प्रक्रिया को आगे नहीं बढाए। वहीं अदालत ने मामले में राज्य सरकार को जवाब पेश करने के लिए समय दिया है।