आनरेरी कैप्टन रमेश चंद का 28 साल का सेवाकाल गुजारने पर घर में हुआ स्वागत

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रमेश चंद ने बताया कि उन्होंने 29 अक्टूबर 1997 को भारतीय सेना में बतौर सिपाही भर्ती हुआ और एक के बाद एक सफ़लता के साथ रैंक बढ़ता चला गया। आज मैं सौभाग्यशाली हूं कि बहुत सारे जोख़िम के बाद अपने घर वापिस आया हूं। इस दौरान मैंने अपने पिता घोपलू राम और हाल ही में बड़ी माता दर्शनू देवी को खोया हैं। जिन्हें आज हमारी आंखें ढूंढती रह गई।

उन्होंने कहा मैंने सियाचिन जैसे अति दुर्गम क्षेत्रों में भी सेवाएं दी हैं। देश के हर कोने में सेवा देने का मौक़ा मिला। देश और देशवासियों ने हमें हर जगह प्यार और सम्मान दिया। उन्होंने कहा कि मेरे परिवार में पत्नी और एक बेटा-बेटी है। मुझे आर्मी में जाने के लिए मेरे पिता ने प्रेरित किया था और हमारे सबसे बड़े भाई खेम चंद ने हमेशा हमारा मार्गदर्शन किया। वे दो बार सयोग पंचायत प्रधान और वर्तमान में सयोग और जागर से बीडीसी सदस्य हैं। पंडोह क्षेत्र के लोगों ने आज घर पहुंचने पर रमेश चंद का गर्मजोशी के साथ स्वागत किया।

पंचायत प्रधान सयोग वीना महंत ने स्वयं रमेश चंद का स्वागत किया और कहा कि यह हमारे लिए गौरव की बात है कि भारतीय सेना के अधिकारी हमारे गांव से है। निश्चित रूप से रमेश चंद की सेवानिवृत्ति क्षेत्र के युवाओं के लिए प्रेरणा है।