अपने संबोधन में डॉ. अशोक कुमार पांडा ने हिमाचल प्रदेश जैसे पहाड़ी राज्यों के कृषक परिवारों, विशेष रूप से छोटे और सीमांत किसानों पर पीएम-किसान के परिवर्तनकारी प्रभाव के बारे में विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि यह योजना सुनिश्चित और समय पर वित्तीय सहायता प्रदान करती है जो किसानों की आर्थिकी को मजबूत करती है, जिससे वे आवश्यक आदानों में निवेश कर सकते हैं, फसल पैटर्न में विविधता ला सकते हैं और बेहतर तकनीकों को अपना सकते हैं।
कुलपति ने प्राकृतिक खेती के बढ़ते महत्व पर विशेष जोर दिया और कहा कि हिमाचल प्रदेश में अपनी विविध कृषि-जलवायु परिस्थितियों के कारण क्षेत्र आधारित प्राकृतिक खेती समूहों को विकसित करने की अपार संभावनाएं हैं।
कार्यक्रम का आरम्भ में निदेशक प्रसार शिक्षा डॉ. विनोद शर्मा ने मुख्य अतिथि और प्रतिभागियों का स्वागत से हुआ। तकनीकी सत्र में किसानों के साथ विशेषज्ञों की बातचीत हुई। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के सब्जी वैज्ञानिक डॉ. बी.एन. सिन्हा ने उन्नत सब्जी उत्पादन विधियों पर जानकारी दी। डॉ. लव भूषण ने वैज्ञानिक खेती की आधारशिला के रूप में मृदा परीक्षण-आधारित पोषक तत्व प्रबंधन पर विस्तार से बताया और डॉ. बृज वनिता ने घरेलू स्तर पर और डेयरी संचालन में स्वच्छ और स्वस्थ दूध के उत्पादन पर मार्गदर्शन साझा किया।
प्रतिभागियों ने प्रधानमंत्री के संबोधन और पीएम-किसान योजना के लोकार्पण का सीधा प्रसारण देखा। कार्यक्रम को उत्कृष्ट प्रतिक्रिया मिली और कांगड़ा जिले के विभिन्न हिस्सों से 150 किसानों ने भाग लिया। सभी उपस्थित लोगों को बीज के पैकेट और कृषि साहित्य वितरित किए गए।