सामाजिक क्रांति के अग्रदूत थे महर्षि दयानंद: सिंह

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मुख्य अतिथि प्रो. श्रीप्रकाश सिंह ने कहा कि महर्षि दयानन्द सरस्वती केवल एक धार्मिक सुधारक नहीं, बल्कि सामाजिक क्रांति के अग्रदूत थे। उन्होंने वेदों की ओर लौट चलो का जो नारा दिया, वह भारतीय समाज में ज्ञान, विवेक और आत्मसम्मान का शंखनाद था। उन्होंने नारी शिक्षा, समानता, स्वराज, स्वभाषा और स्व संस्कृति की अवधारणा को जनमानस तक पहुंचाया। प्रो. सिंह ने कहा कि महर्षि दयानन्द ने न केवल आर्य समाज की स्थापना की, बल्कि आधुनिक भारत की स्वतंत्रता चेतना को भी प्रज्वलित किया।

प्रो. हेमलता कृष्णमूर्ति ने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि महर्षि दयानन्द सरस्वती का उद्देश्य केवल धार्मिक सुधार तक सीमित नहीं था। वे सम्पूर्ण राष्ट्र के नैतिक और आध्यात्मिक पुनर्जागरण के पक्षधर थे। उन्होंने कहा कि आज जब समाज भौतिकता के अंधकार में डूब रहा है, तब दयानन्द के अविद्या निवारण और सत्य के अनुसंधान के सिद्धांत अत्यंत आवश्यक हैं। उन्होंने विद्यार्थियों का आह्वान किया कि वे वेदों की भावना, संस्कृति के गौरव और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को जीवन में अपनाएं।

मुख्य वक्ता प्रो. सुरेन्द्र कुमार ने कहा कि महर्षि दयानन्द ने भारत में वैचारिक क्रांति की नींव रखी। शिक्षा को समाज परिवर्तन का सबसे प्रभावी माध्यम माना और नारी शिक्षा, समान अवसर तथा जातिगत भेदभाव के उन्मूलन की दिशा में उल्लेखनीय कार्य किया। प्रो. कुमार ने कहा कि महर्षि दयानन्द का भारत पुनर्जागरण में वही स्थान है जो यूरोप के पुनर्जागरण में रूसो या लूथर का रहा। उनके विचारों से ही राष्ट्रीय आंदोलन को वैचारिक ऊर्जा मिली।

प्रो. ब्रह्मदेव ने बताया कि दो दिवसीय संगोष्ठी में प्रस्तुत शोधपत्रों में महर्षि दयानन्द के दार्शनिक, सामाजिक और शैक्षिक योगदान पर गहन विचार-विमर्श किया गया।उन्होंने कहा कि संस्कृत विभाग ने अपने समर्पण, अनुशासन और परिश्रम से इस आयोजन को सफलता के शिखर तक पहुंचाया।

संगोष्ठी के दौरान विभिन्न सत्रों में महर्षि दयानन्द सरस्वती के वैदिक दर्शन, सामाजिक सुधार, शिक्षा दर्शन, महिला सशक्तिकरण, तथा स्वतंत्रता चेतना में योगदान पर अनेक शोधपत्र प्रस्तुत किए गए। इस अवसर पर प्रो नवनीत, डॉ दीपक कुमार, डॉ अजीत सिंह तोमर, डॉ अनिल धीमान, डॉ रविन्द्र, डॉ भगवानदास जोशी, डॉ सुनीति आर्य, डॉ पंकज कौशिक, कुलभूषण शर्मा, हेमंत सिंह नेगी सहित अन्य शिक्षक, शिक्षकेत्तर कर्मचारी व शोध छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।