वैश्विक वित्तीय अनुशासन में भारत का उदय

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वित्तीय कार्रवाई कार्यबल (एफएटीएफ) की नवीनतम रिपोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारत अब वैश्विक वित्तीय अनुशासन का अनुयायी नहीं रहा है, वह अब उससे एक कदम आगे उसकी दिशा निर्धारित करने वाला देश बन चुका है। “संपत्ति पुनर्प्राप्ति मार्गदर्शन तथा श्रेष्ठ अभ्यास” (एसेट रिकवरी गाइडेंस एंड बेस्ट प्रैक्टिसेज) शीर्षक से जारी यह दस्तावेज अंतरराष्ट्रीय वित्तीय अपराध नियंत्रण की सोच में एक क्रांतिकारी परिवर्तन है। इसमें भारत और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जिस तरह प्रशंसा की गई है, वह संस्थागत सफलता का प्रमाण है और पारदर्शी शासन तथा उत्तरदायी प्रशासन के प्रति भारत की गहरी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

यहां उल्‍लेखित है कि पिछले तीन दशकों में पहली बार एफएटीएफ ने किसी विकासशील देश को वैश्विक नीतिगत निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का श्रेय दिया है। भारत ने घरेलू स्तर पर आर्थिक अपराधों, ठगी और पोंजी योजनाओं पर नियंत्रण किया है। साथ ही, अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सुरक्षा ढांचे को सुदृढ़ बनाने में निर्णायक उपस्थिति दर्ज कराई है। “संपत्ति पुनर्प्राप्ति मार्गदर्शन” के प्रारूप को तैयार करने में भारत ने नेतृत्वकारी भूमिका निभाई, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि भारत अब नीतियों का पालन करने वाला नहीं, उन्हें आकार देने वाला देश बन चुका है।

वस्‍तुत: एफएटीएफ की नई नीति के अंतर्गत देशों को यह अधिकार प्राप्त होगा कि वे अपराध सिद्ध हुए बिना भी अवैध संपत्तियों को जब्त कर सकें। यह परिवर्तन उन मामलों में उपयोगी सिद्ध होगा जहाँ अपराधी न्यायिक प्रक्रिया से बचने के लिए विदेश भाग जाते हैं या मुकदमे लंबे समय तक चलते रहते हैं। भारत में यह मॉडल पहले ही सफल सिद्ध हुआ है। ईडी ने एग्री गोल्ड निवेश घोटाला, बिटकनेक्ट क्रिप्टो घोटाला और आइआरईओ समूह प्रकरण में संपत्तियाँ जब्त कर प्रभावित निवेशकों को राहत दी है। एफएटीएफ ने इन मामलों को “न्याय केंद्रित प्रवर्तन प्रणाली” का आदर्श उदाहरण बताया है।

‘पीड़ित केंद्रित न्याय’ की भारतीय दृष्टि

इस तरह देखें तो आज एफएटीएफ के माध्‍यम से भारत की “पीड़ित केंद्रित” नीति को वैश्विक मान्यता प्राप्त हुई है। रोज वैली चिटफंड घोटाले और पेन अर्बन सहकारी बैंक धोखाधड़ी के मामलों में संपत्तियाँ जब्त की गईं और हजारों निवेशकों को उनका धन वापस मिला। यह भारत की न्याय व्यवस्था की नई सोच का प्रतीक है, जो आर्थिक अपराध को विधिक उल्लंघन से आगे बढ़कर सामाजिक विश्वासघात के रूप में देखती है। यह दृष्टिकोण अपराधियों को दंडित करने के साथ ही आम नागरिकों में वित्तीय व्यवस्था के प्रति विश्वास पुनर्स्थापित करता है।

तकनीक और संस्थागत दक्षता: सफलता की रीढ़

भारत की सफलता का आधार कठोर कानूनों के साथ संस्थागत क्षमता और तकनीकी दक्षता है। एफएटीएफ ने भारत की तकनीक-आधारित जाँच प्रणाली की विशेष रूप से सराहना की है। प्रवर्तन निदेशालय और भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा तैयार की गई “केंद्रित ठगी निगरानी प्रणाली” को वैश्विक स्तर पर एक आदर्श नवाचार माना गया है। इस प्रणाली ने संदिग्ध आर्थिक लेन-देन की पहचान और जाँच प्रक्रिया को अधिक वैज्ञानिक और पारदर्शी बनाया है। इसके साथ ही भारत के दो प्रमुख कानून, भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम, 2018 और धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), एफएटीएफ की नज़र में विश्व स्तरीय विधिक उपकरण हैं।

वस्‍तुत: पहला कानून उन अपराधियों के खिलाफ असरदार साबित हुआ है जो विदेश भागकर न्याय से बचने का प्रयास करते हैं, जैसे नीरव मोदी और विजय माल्या। दूसरा कानून जाँच, अभियोजन और संपत्ति जब्ती की प्रक्रिया को सशक्त बनाता है। इन दोनों कानूनों ने अपराध नियंत्रण और संपत्ति वसूली का एक ठोस ढाँचा तैयार किया है।

तकनीकी जाँच की सफलता: ₹17,520 करोड़ का पोंजी प्रकरण

हाल ही में ₹17,520 करोड़ के पोंजी (निवेश) घोटाले की जाँच में भारत की तकनीकी दक्षता ने विश्व समुदाय को प्रभावित किया है। ईडी ने डेटा विश्लेषण और डिजिटल फॉरेंसिक की मदद से फर्जी कंपनियों, खातों और धन प्रवाह की पहचान की। एफएटीएफ ने इसे “जटिल किन्तु परिणामकारी जाँच” का उदाहरण बताया। इस कार्रवाई ने यह संदेश दिया कि भारत अब अपने हितों की रक्षा करने के साथ-साथ वैश्विक वित्तीय अपराधों के विरुद्ध एक निर्णायक साझेदार बन चुका है।

कहना होगा कि एफएटीएफ की रिपोर्ट आज वास्‍तव में प्रशंसा के साथ भारत को उसकी जिम्मेदारी का स्मरण भी कराती है। संस्था ने भारत को सुझाव दिया है कि वह अपने जाँच तंत्र को और अधिक पारदर्शी और उत्तरदायी बनाए। यहां की गईं तीन प्रमुख सिफारिशें भी ध्‍यान देने योग्‍य हैं। वित्तीय अपराधों की सुनवाई हेतु विशेष न्यायालयों की स्थापना। जाँच एजेंसियों के मानव संसाधनों का विस्तार। त्वरित संपत्ति वसूली प्रणाली का विकास। अब भारत ने इस दिशा में काम आरंभ कर दिया है। वित्त मंत्रालय ने “संपत्ति पुनर्प्राप्ति प्रकोष्ठ” की स्थापना की घोषणा की है, जो देश और विदेश दोनों स्तरों पर जब्त संपत्तियों की वसूली प्रक्रिया को समन्वित करेगा।

भारत की नीति का वैश्विक प्रभाव

एफएटीएफ ने संकेत दिया है कि भारत की नीतियों का प्रभाव अब एशिया–प्रशांत क्षेत्र से आगे तक पहुँच चुका है। सिंगापुर, संयुक्त अरब अमीरात और इंडोनेशिया जैसे देशों ने भारत के साथ सूचना साझाकरण समझौते किए हैं ताकि वे भारत के अनुभव और प्रणालियों से सीख लेकर अपने वित्तीय तंत्र को सुदृढ़ बना सकें। यह भारत की नीति और संस्थागत विश्वसनीयता का प्रमाण है। इससे यह भी स्पष्ट होता है कि भारत अब वैश्विक वित्तीय नैतिकता के निर्माण में एक मार्गदर्शक शक्ति बन रहा है।

कुल मिलाकर इस रिपोर्ट से विदेशी निवेशकों का भारत की अर्थव्यवस्था में भरोसा और बढ़ेगा। जब निवेशक यह देखते हैं कि उनकी पूँजी सुरक्षित है और सरकार वित्तीय अपराधों से निपटने में सक्षम है, तो निवेश वातावरण मजबूत होता है। यह स्थिति भारत की आर्थिक स्थिरता के लिए अत्यंत महत्त्वपूर्ण है और “मेक इन इंडिया” जैसी पहलों को नई गति प्रदान करेगी। भारत की यह उपलब्धि सिद्ध करती है कि राजनीतिक इच्छाशक्ति, कानूनी सुदृढ़ता और तकनीकी नवोन्मेष के समन्वय से आर्थिक अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण संभव है।

एफएटीएफ द्वारा भारत को “आदर्श देश” कहकर संबोधित किया जाना प्रशंसा के साथ भविष्य की दिशा भी दर्शाता है। अब भारत को इस विश्वास को स्थायी बनाना है। नीतियों और संस्थागत संस्कृति दोनों में पारदर्शिता को गहराई से स्थापित करना होगा। हम उम्‍मीद करें, इसी मार्ग पर चलते हुए भारत एक प्रबल अर्थव्यवस्था के साथ-साथ वैश्विक वित्तीय न्याय का नेतृत्वकर्ता बनेगा।