कार्यक्रम की मुख्य अतिथि श्रीमती रीना त्रिपाठी (वरिष्ठ शिक्षाविद एवं समाजसेवी) ने कहा “कला केवल सौंदर्य नहीं, बल्कि समाज की आत्मा होती है। जब कोई कलाकार अपनी तूलिका से भावनाएं उकेरता है, तो वह चित्र नहीं, एक विचार, एक संवेदना गढ़ता है। जहाँ कला है, वहाँ संवेदना है और जहाँ संवेदना है, वहीं सच्ची मानवता है।”
महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. पूनम शुक्ला ने कहा कि गंगोत्री देवी महिला महाविद्यालय केवल शिक्षा का केंद्र नहीं, बल्कि संवेदनशील, सृजनशील और जागरूक नागरिकों का निर्माण करने का एक सशक्त संस्थान है। उन्होंने छात्राओं से कहा कि “कला के माध्यम से अपने भीतर की रोशनी समाज तक पहुँचाना ही सच्ची शिक्षा है।”
इस आयोजन की प्रेरणाशक्ति डॉ. श्रुति त्रिपाठी रहीं, जिन्होंने अपने सृजनशील नेतृत्व से पूरे आयोजन में प्राण फूँक दिए। उन्होंने कहा “रंगों की भाषा सबसे सशक्त होती है, जो शब्दों से नहीं कहा जा सकता, उसे कला सहज कह जाती है।” कार्यक्रम में महाविद्यालय के व्यवस्थापक आशुतोष मिश्र ने कहा “कला वह शक्ति है जो मनुष्य को विचारशील बनाती है। जब शिक्षा कला से जुड़ती है, तभी मानव निर्माण का वास्तविक उद्देश्य पूरा होता है।”
कार्यक्रम के संचालन में आर्ट क्लब डायरेक्टर श्रीमती दुर्गेश नंदिनी त्रिपाठी, निधि त्रिपाठी और पूर्व सैनिक हरीश मणि त्रिपाठी की भूमिका सराहनीय रही। तकनीकी समन्वय और प्रस्तुति का दायित्व श्रुति क्लब प्रोजेक्ट मैनेजर उत्कर्ष त्रिपाठी ने निभाया, जिन्होंने तकनीक और कला का ऐसा संगम प्रस्तुत किया, जिससे आयोजन आधुनिकता और सौंदर्य का अद्भुत उदाहरण बन गया।
वरिष्ठ अस्थि रोग विशेषज्ञ डॉ. संजय कुमार त्रिपाठी ने कहा “कला मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य दोनों का आधार है। जिस समाज में रंग और सृजन जीवित रहते हैं, वह समाज कभी नीरस नहीं होता।” छात्राओं ने भारतीय संस्कृति, नारी सशक्तिकरण, पर्यावरण संरक्षण और मानवता के मूल्य जैसे विषयों पर उत्कृष्ट रचनाएँ प्रस्तुत कीं। कहीं नदियों की रक्षा की पुकार थी, तो कहीं प्रकृति और नारी की करुणा का सुंदर चित्रण। कार्यक्रम के समापन पर मुख्य अतिथि रीना त्रिपाठी और प्राचार्या डॉ. पूनम शुक्ला ने विजेता छात्राओं को प्रमाणपत्र प्रदान किए।