जोधपुर, 20 नवम्बर । राजस्थान हाईकोर्ट में चूरू के सरदारशहर निवासी एक पति-पत्नी ने आपसी सहमति से 13 लाख की जगह एक लाख रुपये में तलाक के लिए समझौता कर लिया है। जस्टिस विनीत कुमार माथुर और जस्टिस बिपिन गुप्ता की डिवीजन बैंच ने दोनों के बीच हुए समझौते की शर्तों के आधार पर मामले को दुबारा फैमिली कोर्ट को भेजने का आदेश पारित किया। दोनों पक्षों के वकीलों ने कोर्ट के सामने समझौते की शर्तें रखीं और दोनों पक्ष खुद भी कोर्ट में उपस्थित थे। इसमें तय हुआ कि फैमिली कोर्ट में सुनवाई के समय पति एक लाख रुपए का डिमांड ड्राफ्ट सौंपेंगे। इसके बाद दोनों ही पक्ष एक-दूसरे से कोई अन्य वित्तीय दावा कर नहीं सकेंगे। दोनों ही पक्ष एक-दूसरे के खिलाफ सभी मामले वापस लेंगे।
चूरू के सरदारशहर निवासी नमिता (बदला हुआ नाम) ने अपने पति नितेश (बदला हुआ नाम) के खिलाफ आपसी सहमति से तलाक की याचिका दायर की थी। सरदारशहर अतिरिक्त जिला न्यायाधीश (फैमिली कोर्ट) ने 16 अक्टूबर 2023 को हिंदू विवाह अधिनियम के तहत आपसी सहमति से तलाक की याचिका खारिज कर दी थी।
फैमिली कोर्ट के आदेश के खिलाफ नमिता ने राजस्थान हाईकोर्ट जोधपुर में अपील दायर की। हाईकोर्ट में 18 नवंबर को जब सुनवाई हुई, तो दोनों पक्षों के वकीलों ने एक नया प्रस्ताव रखा। इसमें दोनों के वकीलों ने सहमति जताई, कि मामले को वापस फैमिली कोर्ट में भेज दिया जाए। उन्होंने प्रार्थना की, कि फैमिली कोर्ट हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 13(बी) के तहत आवेदन पर एक सामान्य समझौता के आधार पर फिर से निर्णय ले, जो दोनों पक्ष फैमिली कोर्ट के समक्ष दाखिल करेंगे।
कोर्ट के रिकॉर्ड से पता चलता है कि दोनों पक्षों ने पहले 22 फरवरी 2021 को फैमिली कोर्ट के समक्ष एक समझौता दाखिल किया था। उस समझौते में विभिन्न शर्तें थीं, जिनमें से एक महत्वपूर्ण शर्त पैराग्राफ 4 में उल्लेखित थी। इसमें उल्लेख था कि नितेश, नमिता को 13 लाख रुपये की राशि का भुगतान करेंगे। हाईकोर्ट में दोनों पक्षों के वकीलों ने सहमति जताई कि 22 फरवरी 2021 के समझौते में उल्लेखित 13 लाख रुपये की राशि की यह शर्त अब लागू नहीं होगी। दोनों पक्षों ने हाईकोर्ट के समक्ष नई समझौता शर्तें प्रस्तुत कीं, जो पुराने समझौते में संशोधन के रूप में थीं। इसमें नितेश नमिता को फैमिली कोर्ट में सुनवाई के समय एक लाख रुपये का डिमांड ड्राफ्ट सौंपेंगे। यह राशि 13 लाख रुपये की मूल शर्त के स्थान पर होगी। दोनों पक्षों ने स्पष्ट रूप से सहमति जताई कि एक लाख रुपये की यह राशि दोनों पक्षों के बीच फुल एंड फाइनल निपटारा होगा। यानी, इस पेमेंट के बाद न तो नमिता और न ही नितेश एक-दूसरे से कोई अन्य वित्तीय दावा कर सकेंगे। हाईकोर्ट की खंडपीठ ने दोनों पक्षों के वकीलों को सुना और उनकी सहमति को नोट किया। कोर्ट ने दोनों पक्षों को स्वयं भी उपस्थित पाया और उनसे भी चर्चा की। कोर्ट ने दोनों पक्षों की सहमति को देखते हुए अपील का निस्तारण करते हुए फैमिली कोर्ट को स्पष्ट निर्देश दिए।