कोरबा : मनरेगा के पशुशेड निर्माण से नारायण को गौपालन में मिली नई राह

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पशुशेड बनने से पहले नारायण कई परेशानियों से जूझ रहे थे—बारिश, ठंड और गर्मी से पशुओं को सुरक्षित रखना भारी पड़ता था।खुले में बंधे पशु अक्सर इधर-उधर चले जाते थे।गीली और कच्ची ज़मीन पर रहने से पशु बार-बार बीमार पड़ते थे,जिससे इलाज पर भारी खर्च करना पड़ता था। इसके साथ ही विषैले जीवों के खतरे के कारण पशुओं की जान पर भी संकट मंडराता था। पक्का शेड बन जाने के बाद यह सभी समस्याएँ खत्म हो गईं। अब पशु सुरक्षित हैं, बीमारियाँ कम हुई हैं, और देखभाल भी आसान हो गई है।

नारायण के पिता धर्मजीत बताते हैं कि, पहले परिवार के पास केवल 2 पशु थे। अब संख्या बढ़कर 5 पशु हो गई है। आगे और पशु खरीदकर गौपालन को एक पूर्ण व्यवसाय के रूप में विकसित करने की उनकी योजना है।आज नारायण का परिवार मनरेगा के इस कार्य से आर्थिक रूप से सशक्त हो रहा है और गौपालन उनके लिए स्थायी आय का नया स्त्रोत बनकर उभरा है।

पशुशेड निर्माण ने न केवल नारायण के पशुओं को सुरक्षित स्थान दिया, बल्कि उनके परिवार को आत्मनिर्भरता की दिशा में भी आगे बढ़ाया। मनरेगा ने उन्हें न सिर्फ रोजगार दिया, बल्कि अपने सपनों को साकार करने का मजबूत आधार भी दिया।

हितग्राही नारायण का कहना है कि, मनरेगा से बने पशुशेड ने हमारे जीवन में व्यवसाय के नए अवसर दिए हैं। अब हम ज्यादा गौपालन करके अच्छी आमदनी कमा रहे हैं। योजना ने हमारे परिवार को आर्थिक संबल दिया है। मनरेगा सिर्फ रोजगार नहीं देती, बल्कि ग्रामीणों के सपनों को भी हकीकत में बदलती है।