मजबूत बाजार नहीं मिलने से ठगे जा रहे बुंदेलखंड के धान किसान

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हमीरपुर, 23 नवम्बर । उत्तर प्रदेश के सूखे बुंदेलखंड में धान की बेशकीमती प्रजाति बासमती का रिकॉर्ड उत्पादन करने वाले किसान हमीरपुर जिले में धान का बाजार न होने से मायूस हैं। बाहर से आने वाले व्यापारियों को औने पौने दामों में धान बेचकर नुकसान उठा रहे हैं। किसानों का कहना कि अगर एक अदद धान मिल स्थापित हो जाए, तो इसका लाभ किसानों को मिलने लगेगा।

कभी बुंदेलखंड की पहचान सूखे चटियल मैदान के रूप में होती थी। किसानों ने इस मिथक को तोड़ा और सूखे चटियल बुंदेली धरा पर धान की वेशकीमती बासमती की प्रजाति 1121 एवं 1718 को उगाकर रिकॉर्ड उत्पादन किया है। लेकिन इस धान का बाजार जिले में नहीं है। बांदा, अतर्रा, बबेरू, खुरहंड से आने वाले धान व्यापारी औने पौने दामों में बासमती धान खरीद रहे हैं। किसानों की मजबूरी है कि वह बाजार के अभाव में इसको कौड़ियों के भाव बेचकर नुकसान उठा रहे हैं। टेढ़ा के किसान सौरभ सिंह, अनिल यादव, राजा सिंह, जगदीश वर्मा, राजेंद्र सिंह, मुलायम सिंह परिहार आदि ने रविवार को बताया कि एक दशक पूर्व टेढ़ा से बासमती धान की उत्पादन की शुरुआत हुई थी।

तब यह कुछ ही बीघे में रोपित किया गया था। अब यह हजारों हेक्टेयर क्षेत्र में उत्पादित हो रहा है। प्रगतिशील कृषक सौरभ सिंह ने बताया कि पंजाब हरियाणा में बासमती धान का वास्तविक मूल्य 3500 से 4000 रुपये प्रति क्विंटल है। जबकि यहां महज 2800 से 3000 रुपये प्रति कुंतल बिक रहा है। इस लिहाज से किसानों को करीब 1000 रुपये प्रति क्विंटल का नुकसान उठाना पड़ रहा है। अगर एक अदद चावल मिल जिले में स्थापित हो जाए, तो किसानों को इसका लाभ मिल सकता है।

किसानों के अनुसार ब्लाक क्षेत्र में 15000 हेक्टेयर में इस वर्ष बासमती धान का उत्पादन हुआ है। औसत उत्पादन 5 से 6 क्विंटल प्रति बीघा है। लाखों क्विंटल बासमती धान पैदा करने वाले किसानों को वाजिब दाम नहीं मिल पा रहे हैं। किसान औने पौने दामों में धान बेचने को मजबूर है। धान खरीद केंद्र के प्रभारी रणजीत सिंह ने रविवार को बताया कि सरकारी केंद्र में बासमती प्रजाति के धान खरीद का प्रावधान नहीं है। यहां पर महज मोटा धान खरीदा जा रहा है। सुमेरपुर मंडी सचिव ब्रजेश निगम ने बताया कि दो व्यापारियों ने टेढ़ा मंडी में धान खरीद का लाइसेंस लिया है।