अस्पताल प्रबंधन के अनुसार फिलहाल 16 मरीज नियमित रूप से डायलिसिस ले रहे हैं। डायलिसिस तकनीशियन विजय ठाकुर का कहना है कि रोजाना 4 से 6 मरीजों का उपचार किया जाता है, जिससे न सिर्फ मरीजों की परेशानी कम हुई है, बल्कि समय पर डायलिसिस मिल पाने से उनकी स्थिति में स्थिरता बनी रहती है।
जिला अस्पताल में कुल पांच डायलिसिस मशीनें संचालित हो रही हैं। इनमें दो पॉजिटिव और तीन नेगेटिव मशीनें शामिल हैं, जिन्हें मरीजों की श्रेणी और संक्रमण नियंत्रण के प्रोटोकॉल के अनुसार इस्तेमाल किया जाता है। इस सिस्टम से इलाज अधिक सुरक्षित और व्यवस्थित रूप से हो रहा है।डायलिसिस की सुविधा यहीं मिलने से आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को खास फायदा हुआ है। पहले लंबी दूरी, आवागमन का खर्च और समय की दिक्कत के कारण कई मरीज उपचार में देरी कर देते थे। अब जिले में ही आपात स्थिति में तुरंत सहायता और विशेषज्ञ निगरानी संभव हो पाई है।
अस्पताल प्रशासन का कहना है कि मरीजों की संख्या बढ़ने पर अतिरिक्त मशीनें और प्रशिक्षित तकनीशियनों की नियुक्ति की जाएगी, ताकि कोई भी मरीज उपचार के लिए बाहर जाने को मजबूर न हो।
मुख्य जिला चिकित्सा अधिकारी डॉ. बसंत के अनुसार पिछले तीन सालों से जिला अस्पताल में डायलिसिस की व्यवस्था सफलतापूर्वक चल रही है। इससे बलरामपुर की स्वास्थ्य सेवाओं में उल्लेखनीय सुधार हुआ है और मरीजों का भरोसा भी बढ़ा है।