फेरी लगाने वाले दुकानदार रफ़ीक़ ख़ान ने बताया कि अस्थायी पुल हट जाने पर उन्हें नदी पार जाकर इटावा की ओर जाने के लिए लगभग 50 किलोमीटर का चक्कर लगाना पड़ता है। इससे समय व धन दोनों की बर्बादी होती है।
सब्ज़ी की फेरी लगाने वाले दुकानदार संजीव गौतम ने बताया कि भरेह घाट पर पांटून पुल बनने से चकरनगर तहसील क्षेत्र के गांवों की दूरी मात्र 5 किलोमीटर रह जाती है, जिससे जल्दी फेरी लगाने और व्यवसाय को बढ़ाने में बड़ी सुविधा मिलती है।
असेवटा गांव निवासी अवधेश डीलर ने बताया कि पुल न होने की वजह से इटावा जनपद के पड़ोसी गांवों में किसी कार्यक्रम या निमंत्रण पर शामिल होना भी मुश्किल हो जाता है। कई बार लोग समय पर पहुंच ही नहीं पाते। असेवा गांव के ही निवासी शिवराम सिंह सेंगर ने कहा कि भरेह गांव स्थित सुप्रसिद्ध भरेश्वर बाबा मंदिर में दूर-दराज़ से श्रद्धालु पहुंचते हैं लेकिन पुल न होने के कारण लोगों को भारी परेशानी झेलनी पड़ती है।
गांव के ओमकार शर्मा ने प्रशासन से मांग की कि इटावा और औरैया के ग्रामीण क्षेत्रों को जोड़ने वाला यह महत्वपूर्ण मार्ग लोगों की जरूरत है। उन्होंने कहा कि शासन को जल्द से जल्द पांटून पुल का स्थायी निर्माण करवाना चाहिए, ताकि दोनों जिलों का आपसी संपर्क और आवागमन बेहतर हो सके।
स्थानीय जनता का कहना है कि पांटून पुल का स्थायी निर्माण होने से व्यापार, शिक्षा, स्वास्थ्य और धार्मिक गतिविधियों में तेजी आएगी और क्षेत्र के विकास को भी नई दिशा मिलेगी।