दिग्भ्रमित होकर तेजस्वी यादव चुनावी प्रक्रिया का उड़ा रहे मखौलः भाजपा

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न साझा घोषणा-पत्र बना पाए हैं और न ही साझा सीएम क्या, डिप्टी सीएम का भी निर्धारण नहीं कर पाए हैं। उन्होंने कहा कि इन समस्याओं से विचलित और दिग्भ्रमित होकर तेजस्वी यादव अब वो सारी बातें करना शुरू कर दिए हैं जो न सिर्फ उनके दावों की विश्वसनीयता पर प्रश्न चिन्ह लगाती है, बल्कि ऐसा लगता है कि चुनावी प्रक्रिया का मखौल उड़ाती है।

इन्हीं मुद्दों से परेशान होकर तेजस्वी अब पूरी चुनावी प्रक्रिया का मज़ाक उड़ाने वाले बयान देने लगे हैं।

डॉ. त्रिवेदी ने कहा कि

पहले उन्होंने दावा किया था कि परिवार के हर सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाएगी,

लेकिन मेरा मानना ​​है कि कोई भी समझदार व्यक्ति इस वादे की बेतुकी बात समझ सकता है। बिहार की आबादी लगभग 13.5 करोड़ है। इस हिसाब से तो सिर्फ़ वेतन पर ही लगभग 29 लाख करोड़ रुपये खर्च होंगे, जबकि बिहार का कुल बजट सिर्फ़ 3.17 लाख करोड़ रुपये है।

इससे साफ़ ज़ाहिर होता है कि जब किसी नेता के पास उचित शिक्षा या समझ का अभाव होता है, तो वह किस तरह के अवास्तविक और भ्रामक बयान दे सकता है।

मुझे लगता है कि इन्हीं मुद्दों से परेशान होकर तेजस्वी अब पूरी चुनावी प्रक्रिया का मज़ाक उड़ाने वाले बयान देने लगे हैं।

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