सत्य साईं बाबा को श्रद्धांजलि होगा दुनिया का सबसे बड़ा निःशुल्क निजी अस्पताल

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सत्य साईं ग्राम (चिकबल्लापुर), 27 अक्टूबर । सत्य साईं बाबा की जन्मशती के मौके पर यहां बन कर तैयार 600 बिस्तरों वाला अत्याधुनिक सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल विश्व का पहला ऐसा अस्पताल होगा जहां कैंसर, हृदय रोग आदि गंभीर से गंभीर रोगों का विश्वस्तरीय इलाज सुलभ हाेगा, लेकिन इसके लिए रोगी से कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा और इसीलिए अस्पताल में कोई भी बिलिंग काउन्टर नहीं खोला गया है। इसका उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेन्द्र माेदी करेंगे।

कर्नाटक में बेंगलुरु से करीब 50 किलोमीटर दूर चिकबल्लापुर जिले के मुद्देनहल्ली तालुका में स्थित सत्य साईं ग्राम में स्थापित श्री मधुसूदन साई आयुर्विज्ञान एवं शोध संस्थान का लगभग 300 बिस्तरों का अस्पताल हर माह करीब 36 से 38 हजार बाह्य रोगियों को उपचार एवं दवाएं निःशुल्क मुहैया करा रहा है। इसका उद्घाटन 23 नवंबर 2023 में प्रधानमंत्री मोदी ने किया था। इसी के बगल में एक नया 600 बिस्तरों वाला अत्याधुनिक सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल बन कर करीब-करीब तैयार हो गया है, जिसमें कैंसर, हृदय रोग, किडनी, लिवर आदि तमाम रोगों के विशिष्ट उपचार की सुविधा उपलब्ध होगी। इसमें उपचार एवं दवाओं सहित किसी भी चीज़ का कोई शुल्क रोगी से नहीं लिया जाएगा। इसका उद्घाटन करने के लिए प्रधानमंत्री मोदी को आमंत्रित किया गया है। इससे पहले सत्य साईं ग्राम में साै दिन का सांस्कृतिक उत्सव भी चल रहा है जिसमें साै से अधिक देेशाें के सांस्कृतिक दल भाग लेने आ रहे हैं। प्रतिदिन एक या दाे देशाें के सांस्कृतिक प्रस्तुतियां हाेती हैं और भाेजन में एक या दाे व्यंजन उन देशाें के शामिल किये जाते हैं। इस कार्यक्रम में केन्द्रीय संस्कृति मंत्रालय और इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केन्द्र भी सहभागी है। सत्य साईं ग्राम में इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केन्द्र की प्रदर्शनी भी लगायी गयी है।

श्री मधुसूदन साईं आयुर्विज्ञान एवं शोध संस्थान के मुख्य विपणन अधिकारी विवेक कुमार ने बताया कि अस्पताल में उपचार के लिए देश के कोने-कोने से रोगी आते हैं और बिना उनकी आर्थिक स्थिति के बारे में जाने केवल आधार कार्ड और मेडिकल रिपोर्ट देख कर इलाज शुरू कर दिया जाता है। वर्तमान में चालू 300 बिस्तर वाले अस्पताल में कोई बिलिंग काउन्टर नहीं है और ना ही कोई बिलिंग काउन्टर नये अस्पताल में होगा। परन्तु जिन मरीज़ों का बीमा होगा, उनकी बीमा पॉलिसी से जो मिलेगा, उतना ही लिया जाएगा। किसी मरीज़ से एक रुपया भी नहीं लिया जाएगा।

उन्होंने कहा कि अस्पताल का स्लोगन है- “सिर्फ दिल, नो बिल”। यहां न जात-पात, न धर्म-वर्ग, न अमीर-गरीब का भेद किया जाता है और सबका समान आदर एवं गंभीरता से इलाज किया जाता है।

विवेक कुमार ने बताया कि इस भव्य चिकित्सालय के निर्माण में 300 से अधिक श्रमिक, इंजीनियर और कर्मचारी रात-दिन एक करके काम कर रहे हैं जो 10 नवंबर तक पूरा करने का लक्ष्य है। उन्होंने कहा कि 6 लाख 50 हज़ार वर्ग फुट क्षेत्र में बन रहे इस अस्पताल में 11 ऑपरेशन थिएटर, 400 जनरल बेड, 100 आईसीयू बेड और 100 प्राइवेट बेड होंगे। इस चिकित्सालय के मध्य में स्थापित होने वाली 21 फुट ऊंची श्री सत्य साई बाबा की भव्य प्रतिमा सभी को दिव्य दर्शन प्रदान करेगी। इस प्रकार यह कॉरपोरेट अस्पतालों की टक्कर का होगा जहां कम से कम 20 क्लीनिकल विभाग होंगे जिन्हें बाद में और बढ़ाया जाएगा।

उन्होंने कहा कि सुविधाओं की दृष्टि से देखें तो प्रतीक्षालय से लेकर आईसीयू, अत्याधुनिक निदान सुविधाएं- सीटी स्कैन, एमआरआई, आधुनिक मेडिकल लैब्स आदि हर व्यवस्था अंतरराष्ट्रीय स्तर की होगी। यहां केवल रोगियों का ही नहीं बल्कि उनके साथ आने वाले परिजनों का भी पूरा ध्यान रखा गया है। यहां एक विशाल भोजनालय तैयार हो रहा है, जहां एक समय में 300 लोग एकसाथ बैठकर भोजन कर सकेंगे।

श्री सत्य साईं प्रेमामृत प्रकाशन एंड ग्लोबल आउटरीच एंड कम्युनिकेशन के अध्यक्ष एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी के. सुचेतन रेड्डी ने कहा कि यह संस्थान केवल नि:शुल्क स्वास्थ्य सेवा ही नहीं, अपितु नि:शुल्क चिकित्सा शिक्षा भी प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि श्री मधुसूदन साई आयुर्विज्ञान एवं शोध संस्थान विश्व का पहला गैर सरकारी आवासीय मेडिकल कॉलेज है, जो पूर्णतया निःशुल्क है।

उन्होंने कहा कि संस्थान में हर वर्ष 50 विद्यार्थियों का प्रवेश लिया जाता है। राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग के कठोर नियमों के अधीन प्रवेश की एनईईटी परीक्षा की मेरिट के आधार पर छात्रों को प्रवेश दिया जाता है। यहां देश के वर्तमान आरक्षण कानून लागू हैं। इसके अतिरिक्त कोई अन्य आरक्षण या प्राथमिकता नहीं दी जाती है।

रेड्डी ने कहा कि वैश्विक इतिहास में एक और अद्भुत पहल है। यह मानवता की सेवा को समर्पित चिकित्सा का एक अनुपम मंदिर है जहां किसी को भी गरीबी के कारण स्वास्थ्य सेवा से वंचित नहीं होना पड़ेगा और यही इसका एकमात्र लक्ष्य है।

उन्होंने कहा कि अपने गुरु, ईश्वर और मार्गदर्शक— श्री सत्य साई बाबा के जन्मशताब्दी उत्सव की पावन बेला पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि स्वरूप, श्री मधुसूदन साई सम्पूर्ण मानवता को यह भव्य चिकित्सालय समर्पित कर रहे हैं। छत्तीसगढ़ के रायपुर से आरम्भ हुई श्री सत्य साई संजीवनी नामकी यह प्रेमधारा, भारत की सीमाओं को पार कर चुकी है। आज इस सेवा से न केवल भारत के विभिन्न राज्य अपितु विश्व के 12 देश लाभान्वित हो रहे हैं।

उन्होंने कहा कि हमारा प्राथमिक श्री सत्य साई संजीवनी अस्पताल दुनिया का सबसे बड़ा निःशुल्क बाल हृदय अस्पताल नेटवर्क है। यह जन्मजात हृदय रोग से पीड़ित बच्चों को निःशुल्क उपचार और शल्य चिकित्सा प्रदान करता है। छत्तीसगढ़ के नवा रायपुर, हरियाणा के पलवल, महाराष्ट्र के नवी मुंबई एवं यवतमाल, तेलंगाना के कोंडापाक, झारखंड में जमशेदपुर तथा उत्तराखंड में रायवाला में ये अस्पताल मानवता की बड़ी सेवा कर रहे हैं। वैश्विक स्तर पर स्वास्थ्य मिशन के आंकड़ों को देखें तो अब तक 68,000+ सर्जरी पूरी तरह निःशुल्क की जा चुकी हैं। 44 लाख से अधिक बाह्य रोगी परामर्श दिया जा चुका है। 15,900 से ज्यादा सुरक्षित प्रसव कराए गए हैं। 37,000 से अधिक बच्चों के हृदय दोषों का उपचार किया गया है। 1.4 लाख से अधिक अन्य रोगियों को भर्ती करके उनका उपचार किया गया है और 6.87 लाख से ज्यादा स्वास्थ्य जांचें ग्रामीण क्षेत्रों में की गई हैं।

रेड्डी ने ग्रामीण क्षेत्र में इस स्तर के चिकित्सालय को देश के इतिहास का वास्तव में एक अद्वितीय और अभूतपूर्व क्षण करार देते हुए कहा कि यहां प्रतिदिन हज़ारों रोगियों का निःशुल्क उपचार हो रहा है। यहां जन्मे असंख्य नवजात शिशुओं को नवजीवन प्राप्त हुआ है। देश की अनेक प्रतिष्ठित कंपनियां अपनी कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (सीएसआर) के अंतर्गत इस “वन वर्ल्ड – वन फैमिली” मिशन के सेवा महायज्ञ में भाग ले रही हैं। वे श्री मधुसूदन साई के उस संकल्प के साथ खड़ी हैं कि कोई भी व्यक्ति धनाभाव के कारण स्वास्थ्य सेवा से वंचित न रहे।

उन्होंने संगठन द्वारा देश में कुपोषण के खिलाफ मिशन में अपने योगदान की जानकारी देते हुए बताया कि “अन्नपूर्णा मॉर्निंग न्यूट्रिशन प्रोग्राम” प्रतिदिन 1 करोड़ से अधिक बच्चों को नाश्ता प्रदान करता है, जो भारत के 1,47,000 से अधिक सरकारी स्कूलों और आंगनवाड़ियों में चलाया जा रहा है। इसमें “साईश्योर”— एक वैज्ञानिक रूप से तैयार रागी (श्रीअन्न) आधारित पौष्टिक पूरक बच्चों को दूध या पानी के साथ दिया जा रहा है, जो उन्हें 50 प्रतिशत दैनिक आवश्यक पोषण प्रदान करता है। यह कार्यक्रम इंडोनेशिया, थाईलैंड, नाइजीरिया, मलावी, श्रीलंका और ऑस्ट्रेलिया तक फैल चुका है।

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