चार दिनों तक चलने वाले इस पवित्र पर्व के दौरान सोनी किन्नर ने नहाय-खाय से लेकर उदयीमान अर्घ्य तक सभी अनुष्ठान पूरे पारंपरिक तरीके से संपन्न किए।
उन्होंने कहा कि छठ केवल पर्व नहीं, बल्कि आस्था, अनुशासन और आत्मबल का प्रतीक है।
सोनी किन्नर ने बताया कि वे कई वर्षों से छठ व्रत करने की सोंच रही थी, जो इसबार की। समाज में समानता और सद्भाव का संदेश देने का यह उनका उद्देश्य है। उन्होंने कहा कि छठ पूजा में कोई भेदभाव नहीं होता, सभी भक्त सूर्य देव और छठी मैया के चरणों में समान रूप से नतमस्तक होते हैं। अर्घ्य के दौरान बड़ी संख्या में स्थानीय लोग और श्रद्धालु उपस्थित रहे। सोनी किन्नर के छठ व्रत को देखकर कई लोगों ने कहा कि यह समाज के लिए प्रेरणा का कार्य है, कि सच्ची आस्था के आगे कोई भेदभाव मायने नहीं रखता।