सेमवती ने “जय माँ जगदम्बा महिला स्व-सहायता समूह” से जुड़कर अपनी नई शुरुआत की। उनका उद्देश्य था दृ छोटी-छोटी बचतों को जोड़कर परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारना और आगे कुछ बड़ा करना। समूह की बैठकों में उनकी सक्रियता, मेहनत और नेतृत्व क्षमता को देखते हुए उन्हें बैंक सखी के रूप में चयनित किया गया। दस दिन का विशेष प्रशिक्षण पूरा करने के बाद उन्हें ग्राम संगठन से 68 हजार रुपये का ऋण मिला। इस राशि से उन्होंने लैपटॉप और प्रिंटर खरीदा और डिजिटल सेवाओं की शुरुआत की।
सेमवती का काम धीरे-धीरे गाँव में फैलने लगा। उनकी बढ़ती सेवाओं को देखते हुए उन्हें माइक्रो एटीएम भी उपलब्ध कराया गया। आज उनके माध्यम से हर माह लगभग 500 लेनदेन संपन्न होते हैं, जिनसे उन्हें 5 से 6 हजार रुपये की मासिक आय हो जाती है। उन्होंने अपनी इस आय को आगे बढ़ाते हुए एक किराना दुकान भी खोली, जिससे उन्हें लगभग 15 हजार रुपये की अतिरिक्त आय होती है। इस तरह उनकी कुल मासिक आय अब 20 हजार रुपये तक पहुँच चुकी है।