केन्द्रीय जनजातीय मंत्रालय के अधिकारियों ने की संग्रहालय की भव्यता और जीवंत प्रस्तुति की सराहना

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भारत सरकार के जनजातीय कार्य मंत्रालय की संचालक दीपाली मासिरकर ने डिजिटलीकरण के लाईट व्यवस्था, सेल्फी प्वाइंट इत्यादि कार्य शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा के साथ मुलाकात कर संग्राहलय के लोकर्पण के लिए सभी इंतजाम के संबंध में जानकारी ली। गौरतलब है कि यह संग्रहालय नई पीढ़ियों को आदिवासियों के स्वतंत्रता विद्रोह की याद दिलाता रहेगा। यह ना सिर्फ आदिवासी वर्गों के लिए बल्कि देश-विदेश के लोगों के लिए भी प्रेरणास्पद होगा।

इस संग्रहालय में डिजिटल माध्यम से आदिवासी समाज के विद्रोहों और उनके नायकों की गाथा की प्रस्तुति संग्रहालय का विशेष आकर्षण रहेगी। पूरे संग्रहालय परिसर को सर्वसुविधायुक्त बनाया जा रहा है। संग्रहालय छत्तीसगढ़ में जनजातीय समाज के ऐतिहासिक गौरव गाथा, शौर्य और बलिदान का प्रतीक है। इस संग्रहालय में स्वतंत्रता आंदोलन के समय छत्तीसगढ़ में हुए 14 आदिवासी विद्रोहों एवं 02 सत्याग्रह- जंगल सत्याग्रह एवं झंडा सत्याग्रह की जीवंत झलक देखने और सुनने को मिलेगी। संग्रहालय के लोकार्पण के लिए साज-सज्जा का कार्य अंतिम चरण में है। भारत सरकार के केन्द्रीय जनजाति मंत्रालय के अधिकारियों ने आज इस संग्रहालय का अवलोकन कर इसकी भव्यता और जीवंत प्रस्तुति की सराहना की।

संग्रहालय के प्रवेश द्वार पर सरगुजा के कलाकारों द्वारा बनाए गए बेहद खूबसूरत नक्काशीदार पैनल लगाए गए हैं। वहीं मुख्य द्वार पर अंदर प्रवेश करते ही लगभग 1400 वर्ष पुराने साल-महुआ एवं साजा वृक्ष की प्रतिकृति बनाई जा गई है, इसकी पत्तियों पर सभी 14 विद्रोहों का जीवंत वर्णन डिजिटल रूप में किया गया है।

शहीद वीर नारायण सिंह संग्रहालय में स्वतंत्रता आंदोलन के समय छत्तीसगढ़ में हुए विभिन्न आदिवासी विद्रोहों जैसे- हल्बा विद्रोह, सरगुजा विद्रोह, भोपालपट्टनम विद्रोह, परलकोट विद्रोह, तारापुर विद्रोह, लिंगागिरी विद्रोह, कोई विद्रोह, मेरिया विद्रोह, मुरिया विद्रोह, रानी चौरिस विद्रोह, भूमकाल विद्रोह, सोनाखान विद्रोह, झण्डा सत्याग्रह एवं जंगल सत्याग्रह के वीर आदिवासी नायकों के संघर्ष एवं शौर्य के दृश्य का जीवंत प्रदर्शन 14 गैलेरियों में किया जा रहा है। वहीं जंगल सत्याग्रह और झंडा सत्याग्रह पर एक-एक गैलेरियों का भी निर्माण किया जा रहा है।