दमोह,13 अक्टूबर मप्र के दमोह जिले में क्षत्रिय करणी सेना द्वारा भव्य वाहन रैली का आयोजन सोमवार को किया गया। रैली की शुरुआत महाराणा प्रताप की प्रतिमा पर माल्यापर्ण से हुई, जिसके पश्चात् एक निजी होटल परिसर में विशाल सामाजिक सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में जिले और आसपास के क्षेत्रों से हजारों की संख्या में क्षत्रिय राजपूत समाज के लोग एकत्रित हुए और समाज की एकता तथा शक्ति का परिचय दिया।
इस अवसर पर करणी सेना के प्रदेश अध्यक्ष इंदल सिंह राणा मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने बताया कि करणी सेना प्रदेशभर में समाज को एकजुट करने के उद्देश्य से वाहन रैलियाँ निकाल रही है और आगामी 15 अक्टूबर को ग्वालियर तथा 15 नवंबर को भोपाल में बड़े स्तर पर आंदोलन की तैयारी कर रही है। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन समाज की 10 सूत्रीय मांगों को लेकर किया जा रहा है, जिन पर यदि सरकार ने शीघ्र निर्णय नहीं लिया तो करणी सेना उग्र आंदोलन करने से पीछे नहीं हटेगी।
उल्लेखनीय है कि दमोह में निकली इस रैली के दौरान करणी सेना के पदाधिकारियों, सदस्यों और समर्थकों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। सैकड़ों वाहनों के काफिले ने शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरते हुए राष्ट्रभक्ति और सामाजिक एकता का संदेश दिया। कार्यक्रम स्थल पर इंदल सिंह राणा ने सभा को संबोधित करते हुए संगठन की आगामी रणनीति और आंदोलन के उद्देश्य पर विस्तृत जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि करणी सेना की 10 सूत्रीय मांगों में हरदा प्रकरण के दोषी अधिकारियों और पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई, ईडब्ल्यूएस आरक्षण को 10 से बढ़ाकर 20 प्रतिशत करने, अग्निवीर योजना को समाप्त कर स्थायी भर्ती बहाल करने, गौ माता को राष्ट्रीय माता घोषित करने, राजनीतिक भागीदारी में जनसंख्या अनुपात के अनुसार उचित प्रतिनिधित्व देने, तथा सभी फसलों पर एमएसपी और नुकसान का मुआवजा देने जैसी प्रमुख मांगे शामिल हैं। इसके अलावा, महापुरुषों के सम्मान की रक्षा, भोजशाला की रिपोर्ट सार्वजनिक करने, एससी-एसटी एक्ट के दुरुपयोग पर रोक लगाने, और मठ-मंदिरों की जमीन पुजारियों को लौटाने की मांगें भी रखी गई हैं।
इंदल सिंह राणा ने यह भी कहा कि करणी सेना 15 अक्टूबर को ग्वालियर में एक ब्राह्मण अधिवक्ता के समर्थन में प्रदर्शन करेगी, जिन्हें धमकियाँ दी जा रही हैं। उन्होंने सरकार और प्रशासन से मांग की कि वह अधिवक्ता की सुरक्षा सुनिश्चित करे और दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई करे। कार्यक्रम के दौरान करणी सेना के स्थानीय पदाधिकारियों ने समाज में एकजुटता बनाए रखने और आने वाले आंदोलनों में बढ़-चढ़कर भाग लेने का संकल्प लिया। दमोह की यह रैली न केवल संगठन की शक्ति का प्रतीक बनी, बल्कि आने वाले प्रदेशव्यापी आंदोलनों के लिए एक मजबूत संदेश भी साबित हुई।