यह कार्यशाला हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय और डीडीएमए कांगड़ा द्वारा एस्टन विश्वविद्यालय (यूके) तथा नेशनल डोंग ह्वा विश्वविद्यालय (ताइवान) के तकनीकी सहयोग से संयुक्त रूप से आयोजित की गई।
कार्यशाला में देश-विदेश के वैज्ञानिकों, शिक्षाविदों, प्रशासनिक अधिकारियों, शोधार्थियों तथा एनडीआरएफ और डीडीएमए के प्रतिनिधियों ने सक्रिय भागीदारी निभाई। विशेषज्ञों ने जलवायु परिवर्तन और आपदा प्रबंधन से जुड़े विभिन्न विषयों जैसे भूस्खलन, भूकंप, विकिरण आपातकाल, अत्यधिक वर्षा और क्लाउड बर्स्ट, अपशिष्ट प्रबंधन, तथा जैविक आपदाएँ पर उनके कारण, प्रभाव और कुशल प्रबंधन रणनीतियों पर गहन विचार-विमर्श किया।
कार्यशाला का उद्घाटन कुलपति प्रो. एस.पी. बंसल ने किया। अपने उद्घाटन संबोधन में उन्होंने वैश्विक स्तर पर जलवायु परिवर्तन और आपदाओं से उत्पन्न चुनौतियों पर प्रकाश डाला और विश्वविद्यालय के पृथ्वी एवं पर्यावरण विज्ञान स्कूल के प्रयासों की सराहना की।