ज्योतिषाचार्य डॉ. महेन्द्र मिश्रा ने बताया कि भारतीय शास्त्र अपनी उत्पत्ति काल से ही पूर्व जन्मार्जितं कर्मों की वर्तमान जीवन में परिणति को भाग्य स्वरूप में आकाशस्थ ग्रह, राशि-नक्षत्रों के परस्पर संबंध द्वारा प्रस्तुत करता हुआ जीवन में शुभाशुभ फलों का सूचक होता है तथा जीवन के संभाव्य अशुभों का ज्ञान कर उनसे निवृत्ति का शास्त्रानुकूल उपाय भी प्रदान करता है। परंतु इन फलों की पूर्ण प्राप्ति में भारतीय वास्तुशास्त्र की भी महती भूमिका होती है, क्योंकि ज्योतिष और वास्तु दोनों ही एक-दूसरे के पूरक हैं और दोनों का लक्ष्य प्रकृति मूलक विकास एवं प्राणी मात्र का कल्याण है।