मौके पर परिधि के समन्वयक राहुल ने बताया कि परिधि लगातार लैंगिक विषमता, घरेलू हिंसा, संपत्ति के अधिकार हेतु कार्यक्रम आयोजित करते रहता है। यू एन ने बालिकाओं की स्थिति और चुनौतियों को केंद्र में लाने के लिए बालिका दिवस की घोषणा की है। लड़कियां आज भी लड़कों की तुलना में कम आंकी जाती हैं और उनपर कम ध्यान दिया जाता है। समाज, समुदाय और परिवार सब जगह लड़कियां दोयम दर्जे की मानी जाती हैं। संस्कृति, धर्म और परंपरा की जकड़न ने लड़कियों का अवसर छीना है। परिधि ने साथी संगठन जलश्रमिक संघ और गंगा मुक्ति आंदोलन के सहयोग से बालिकाओं के बीच भाषण एवं निबंध प्रतियोगिता एवं रैली का भी आयोजन किया गया। विषय था समाज विकास में बालिका शिक्षा की भूमिका।
कार्यक्रम की अध्यक्षता योगेन्द्र सहनी और संचालन जय नारायण ने किया। सर्व प्रथम जेपी को श्रद्धांजलि अर्पित कर कार्यक्रम की शुरुआत हुई। उल्लेखनीय हो आज जेपी जयंती भी है। जेपी ने भी सम्पूर्ण क्रांति के तहत सामाजिक क्रांति की बात की थी।
अध्यक्षता करते हुए वार्ड पार्षद और परिधि के महत्वपूर्ण साथी योगेंद्र सहनी ने कहा कि हम लोग स्त्री पुरुष के बराबरी के लिए शुरुआत से ही प्रयासरत हैं। आज भी 13 प्रतिशत से कम लड़कियां स्नातक तक पहुंच पाती हैं। बीच में ही उसकी पढ़ाई छूट जाती है।क्षगंगा मुक्ति आंदोलन में महिलाएं ही नेतृत्वकर्ता थी।
कुंज बिहारी ने कहा कि स्त्री पुरुष विषमता दुनियां की सबसे बड़ी विषमता है। शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा, समान भागीदारी एवं समान नेतृत्व आज मुख्य समस्या और चुनौतियां हैं। वार्ड पार्षद अजय सहनी और जितेंद्र कुमार ने कहा कि बाल विवाह और बाल मजदूरी के कारण लड़कियों की शिक्षा बीच में ही छूट जाती है।
वरिष्ठ कार्यकर्ता सुनील सहनी ने कहा कि रचना और संघर्ष का काम साथ साथ चलना चाहिए। भाषण प्रतियोगिता में राजनंदिनी, आयुक्ता और रिचा क्रमशः प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय हुई जबकि रानी, रेशमा, राधिका, अंशिका, छोटी, नव्या, स्वीटी और रागिनी की भी प्रस्तुति काबिले तारीफ थी।