याचिकाकर्ताओं की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता अमोल श्रीवास्तव ने सरकार की दलीलों पर सवाल उठाते हुए कहा कि नियमों में सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित क्रीमी लेयर का प्रावधान शामिल नहीं किया गया है। साथ ही, 2002 के नियमों को हाईकोर्ट पहले ही असंवैधानिक करार देकर निरस्त कर चुका है और उन नियमों के तहत हुई पदोन्नतियां आज भी बरकरार हैं।
राज्य सरकार ने हाईकोर्ट से अंतरिम राहत देने की मांग की है। सरकार चाहती है कि नई प्रमोशन पॉलिसी को लागू करने की इजाजत दी जाए। हालांकि, अभी तक हाईकोर्ट में सरकार की अंडरटेकिंग के कारण इस पॉलिसी का क्रियान्वयन रुका हुआ है।
अगली सुनवाई 16 सितंबर को
हाईकोर्ट ने फिलहाल मामले की अगली सुनवाई एक सप्ताह बाद यानी 16 सितंबर तय की है।