जालसाजी मामले में स्वयंभू बाबा चैतन्यानंद सरस्वती की अग्रिम जमानत याचिका खारिज

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कोर्ट ने कहा कि जांच अभी प्रारंभिक चरण में है और पुलिस को उससे पूछताछ की जरुरत है, ताकि फर्जीवाड़ा और साजिश का खुलासा हो सके। कोर्ट ने जांच अधिकारी की इस बात पर गौर किया कि चैतन्यानंद सरस्वती अपने दिए पर उपलब्ध नहीं थे और उनका मोबाइल फोन भी बंद था। कोर्ट ने कहा कि आरोपों की गंभीरता को देखते हुए आरोपित को अग्रिम जमानत नहीं दी जा सकती है।

चैतन्यानंद सरस्वती पर आरोप है कि पावर ऑफ अटॉर्नी हासिल करने के बाद उन्होंने श्री शारदा इंस्टीट्यूट ऑफ इंडियन मैनेजमेंट रिसर्च फाउंडेशन नामक फर्जी ट्रस्ट बनाई। इस ट्रस्ट में आरोपित ने श्री शारदा इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट रिसर्च की संपत्ति को ट्रस्ट को हस्तांतरित कर दिया। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से चैतन्यानंद सरस्वती की अग्रिम जमानत याचिका का विरोध करते हुए कहा गया कि अगर अग्रिम जमानत दी गई तो कोई भी रिकवरी नहीं हो पाएगी।

चैतन्यानन्द स्वामी पर आरोप है कि उसने वसंत कुंज थाने में एफआईआर दर्ज होने के बाद यस बैंक के खाते से ट्रस्ट के नाम पर करीब 50-55 लाख रुपये की निकासी की। इसके साथ ही चैतन्यानन्द स्वामी ने फर्जी दस्तावेज के जरिये विभिन्न नामों पर दो पासपोर्ट बनवाए और अलग-अलग नामों से कुछ बैंकों में खाते हैं।