एमपी-एमएलए के होते हैं चुनाव को छात्रसंघ चुनाव क्यों नहीं

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सुनवाई के दौरान मामले में राज्य सरकार की ओर से पेश जवाब को रिकॉर्ड पर लिया गया। राज्य सरकार की ओर से जवाब में कहा गया कि प्रदेश के नौ विश्वविद्यालय के कुलगुरुओं ने छात्रसंघ चुनाव नहीं कराने की सिफारिश की है। इसके अलावा छात्रसंघ चुनाव मौलिक अधिकार भी नहीं है। इसलिए इस सत्र में प्रदेश के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में छात्रसंघ चुनाव नहीं कराने का निर्णय लिया गया है। जिस पर सुनवाई करते हुए अदालत ने मामले में सुनवाई 22 अगस्त को रखी है। याचिका में अधिवक्ता शांतनु पारीक ने कहा कि विवि के प्रत्येक छात्र को अपना प्रतिनिधि चुनने का अधिकार है। छात्र अपने प्रतिनिधि के जरिए ही प्रशासन तक अपनी समस्याएं पहुंचाते हैं। वहीं लिंगदोह कमेटी की सिफारिश के तहत भी हर साल सत्र आरंभ होने के छह से आठ सप्ताह में छात्रसंघ चुनाव कराए जाने चाहिए, लेकिन राज्य सरकार ने अभी तक चुनाव को लेकर कोई अधिसूचना जारी नहीं की है। इसलिए राज्य सरकार को छात्रसंघ चुनाव कराने के निर्देश दिए जाए।