इस अवसर पर मुख्य अतिथि पूर्व सांसद फुरकान अंसारी ने डीवीसी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि जामताड़ा जिला डीवीसी से सबसे अधिक प्रभावित है। बारिश के मौसम में यहां के गांव पानी में डूब जाते हैं, बावजूद इसके डीवीसी अपना लगभग पूरा सीएसआर फंड पश्चिम बंगाल में खर्च करती है, जबकि बंगाल से भी ज्यादा प्रभावित जामताड़ा को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है।
अंसारी ने कहा कि जमीन हमारी ली गई, गांव हमारे उजाड़े गए, लेकिन विकास का पैसा बंगाल चला गया। यह अन्याय अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने बताया कि जामताड़ा से डीवीसी ने 39 मौजा की 10,500 हेक्टेयर जमीन ली है, जबकि पश्चिम बंगाल से केवल 12 मौजा की जमीन ली गई। इसके बावजूद जामताड़ा के हिस्से में कुछ नहीं आया और यहां के लोग खाली हाथ रह गए।
पूर्व सांसद ने कहा कि विस्थापित गांवों में मुफ्त बिजली उपलब्ध कराना डीवीसी की जिम्मेदारी है। इसके साथ ही 10 किलोमीटर दायरे में चलना, वीरग्राम, लधना, चंद्रढीपा और केलाही जैसे गांवों के लिए माइक्रो लिफ्ट सिंचाई की व्यवस्था की जानी चाहिए। विस्थापितों को उचित मुआवजा, नौकरी, शिक्षा, स्वास्थ्य और पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाएं तुरंत दी जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि झारखंड और पश्चिम बंगाल के विकास की तुलना जनता के सामने रखी जानी चाहिए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि जामताड़ा के साथ सौतेला व्यवहार क्यों किया जा रहा है। अंसारी ने चेतावनी दी कि विस्थापित लोग वर्षों से धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं, लेकिन डीवीसी केवल आश्वासन देकर टालती रही है। अब समय आ गया है कि विस्थापित गांवों को उनका हक मिले, वरना आंदोलन तेज किया जाएगा।
कार्यक्रम में गोड्डा के पूर्व सांसद फुरकान अंसारी के अलावे एसआईपी मैनेजर कौशलेंद्र सिंह, डॉ संघमित्रा नंदी, डीवीसी राजभाषा अधिकारी सह अरविंद सिंह, पियारसोला पंचायत की मुखिया माखूनी हेंब्रम सहित अन्य लोग मौजूद थे।