यह कहानी इस दौर में भी प्रासंगिक साबित हो रही है। बहुत सारे लोग जो किन्ही कारणवश कर्ज लेते हैं और उस कर्ज के दलदल में इतना फंसते जाते हैं की अपना जमीन जायदाद सब कुछ बेच करके भी उस कर्ज से निवृत नहीं हो पाते हैं और अंततः मौत को गले लगा लेते हैं । नाटक में शंकर की भूमिका में प्रदीप सहनी, पत्नी पानमती शर्मा, लड़का धर्मेंद्र भारती, मंगल मुकेश विद्यार्थी, ब्राह्मण अजय यादव, विप्र महाराज मनोज वर्मा व अन्य रज्जब अंसारी ने अपनी अपनी भूमिकाओं के साथ न्याय किया । इस दौरान रचना धूलिया, आशीष धूलिया, समीर अली, बाली सिंह, ख्वाजा अजहरुद्दीन आदि लोग उपस्थित रहे ।