प्रोफेसर अली खान के खिलाफ दर्ज पहली एफआईआर निरस्त, दूसरी पर लगी रोक

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सुनवाई के दौरान हरियाणा पुलिस की ओर से पेश एएसजी एसवी राजू ने कहा कि उसने प्रोफेसर महमूदाबाद के खिलाफ दर्ज एक एफआईआर में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की है और दूसरे में चार्जशीट दाखिल की है। तब न्यायालय ने उस एफआईआर को निरस्त कर दिया जिसमें क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की गई थी। जिस एफआईआर में चार्जशीट दाखिल की गई थी उसमें कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के मजिस्ट्रेट को संज्ञान लेने पर रोक लगा दिया।

कोर्ट ने 16 जुलाई को हरियाणा एसआईटी को निर्देश दिया था कि वो ऑपरेशन सिंदूर पर टिप्पणी मामले में अशोका यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर अली खान महमूदाबाद के खिलाफ दर्ज दो एफआईआर तक ही अपना दायरा रखें। न्यायालय ने हरियाणा एसआईटी को निर्देश दिया था कि वो इस बात की पड़ताल करे कि महमूदाबाद के सोशल मीडिया पोस्ट की वजह से कोई अपराध हुआ है या नहीं। न्यायालय ने कहा था कि एसआईटी का महमूदाबाद के मोबाइल और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक गजट जब्त करने का कोई अधिकार नहीं है क्योंकि वो जांच में सहयोग कर रहे हैं। उच्चतम न्यायालय ने कहा था कि अब महमूदाबाद को जांच के लिए बुलाने की जरुरत नहीं है। न्यायालय ने महमूदाबाद को मिली जमानत की शर्तों में ढील देते हुए उन्हें पोस्ट अपलोड करने, लेख लिखने और अपने विचारों की अभिव्यक्ति की अनुमति दे दी थी।

28 मई को उच्चतम न्यायालय ने कहा था कि इस मामले की जांच के लिए गठित एसआईटी महमूदाबाद के खिलाफ दर्ज दो एफआईआर के संबंध में ही होगी। न्यायालय ने 21 मई को इस मामले की जांच के लिए एसआईटी के गठन का आदेश दिया था। सुनवाई के दौरान न्यायालय ने कहा था कि प्रत्येक आदमी को अपनी बात कहने का अधिकार है लेकिन इस समय इस तरह की सांप्रदायिक बात लिखने की क्या जरूरत थी। देश जब चुनौतियों से जूझ रहा हो, सिविलियन पर हमला हो रहा हो, ऐसे मौके पर लोकप्रियता पाने के लिए ऐसा बयान क्यों दिया गया। खान की पोस्ट की भाषा पर सवाल उठते हुए जस्टिस सूर्यकांत ने कहा था कि हमें यकीन है कि वह बहुत शिक्षित है। दूसरों को चोट पहुंचाए बिना बहुत सरल भाषा में अपनी बात कह सकते थे, ऐसे शब्दों का इस्तेमाल कर सकते थे जो सरल और सम्मानजनक हों।

19 मई को प्रोफेसर खान की ओर से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा था कि महमूदाबाद ने ऑपरेशन सिंदूर पर देशभक्ति पूर्ण बयान दिया था, लेकिन उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। इस मामले में 18 मई को महमूदाबाद को दो दिनों की पुलिस हिरासत में भेजा गया था। प्रोफेसर के खिलाफ हरियाणा में दो अलग-अलग एफआईआर दर्ज हैं।