राजधनवार, गिरिडीह की 32 वर्षीय महिला मरीज को पिछले तीन वर्षों से कमर दर्द और पैरों में कमजोरी की समस्या थी।
रिम्स में कराई गई एमआरआई जांच में पता चला कि मरीज की रीढ़ की नसों को जकड़े हुए एक बड़ा स्पाइनल ट्यूमर है, जो दर्द और कमजोरी का कारण था।
आवश्यक जांच के उपरांत ऑपरेशन की योजना बनाई गई। यह सर्जनी अत्यंत चुनौतीपूर्ण थी क्योंकि ट्यूमर रीढ की 24 नसों के बीच स्थित था, जो पैरों की ताकत, संवेदना, पेशाब (ब्लाडर) और बॉवेल नियंत्रण के लिए अत्यन्त महत्वपूर्ण होता है। यदि ऑपरेशन के दौरान नसों को क्षति होती तो मरीज़ के पैरों में लकवा एवं पेशाब और बॉवेल नियंत्रण में परेशानी हो सकती थी। नसों को क्षति पहुंचने की आशंका के बावजूद रिम्स के चिकित्सकों ने ऑपरेशन के दौरान सभी नसों को सुरक्षित रखते हुए लगभग चार इंच लंबा ट्यूमर जो रीढ़ में बहुत बड़ा ट्यूमर माना जाता है, इसे सफलतापूर्वक निकाला।
सर्जरी के बाद मरीज की स्थिति स्थिर है। होश में आने के बाद मरीज अपने दोनों पैरों का चला रही है और उम्मीद है कि आने वाले दिनों में उसके पैरों की पूरी ताकत आ जाएगी। इससे वह अपने दैनिक कार्य सुचारू रूप से कर पाएगी।
इस सफल ऑपरेशन का नेतृत्व रिम्स निदेशक प्रो (डॉ) राज कुमार और न्यूरोसर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ आनंद प्रकाश ने किया। टीम में न्यूरो सर्जरी विभाग के डॉ नारायण, डॉ राकेश और निश्चेतना विभाग के डॉ मुकेश और उनकी टीम शामिल थी।