भक्त मंडली नृसिंहजी मंदिर से निकलकर गोपालजी के मंदिर तथा जौहरी बाजार के प्राचीन मंदिरों में भजन संकीर्तन करती हुई सुबह 9 बजे सांगानेरी गेट पहुंची। खास बात यह है कि परिक्रमा जिस मंदिर में पहुंची उसी मंदिर के ठाकुरजी के भजन ही सुनाए गए। परिक्रमा सांगानेरी गेट से धुलेश्वर महादेव, हाथीबाबू का बाग, पंचमुखी हनुमान, धूलकोट, गढ़ गणेश, नहर के गणेश जी, धोतीवालों की बगीची, बद्रीनारायण जी की डूंगरी, लाल डूंगरी स्थित कल्याण जी और गणेश मंदिर होते हुए गलता पहुंची। यहां घाट के बालाजी के दर्शन कर भक्त ने विश्राम किया। घाट की गुणी स्थित फतेहचन्द्रमाजी मंदिर में बच्चों को बहुमूल्य जेवर और पौशाक पहनाकर उनका श्रृंगार कर उन्हें श्री गोपालजी के स्वरूप में चांदी की पालकी में विराजमान कराया गया। इन चार बच्चों का चयन लंबी प्रक्रिया के बाद किया गया है।
इस शोभायात्रा में बच्चों को गोपाल जी, राधाजी और दो सखियों के रूप से सजाया गया। बहुमूल्य आभूषण धारण कराए जाने के कारण आधा दर्जन थानों का सशस्त्र पुलिस बल सुरक्षा में तैनात रहा, जिसमें घुड़सवार पुलिस कर्मी भी शामिल रहें। शाम छह बजे परिक्रमा सांगानेरी गेट पहुंची। यहां हाथी, घोड़े, ऊंट, लवाजमे, बैंड बाजे परिक्रमा को शोभायात्रा का रूप दिया गया। भजनों मधुर धुनों के साथ रंग-बिरंगी रोशनी के साथ शोभायात्रा का मार्ग में गणमान्य व्यक्तियों ने आरती कर स्वागत किया। यात्रा सांगानेरी गेट से बड़ी चौपड़, त्रिपोलिया बाजार और चौड़ा रास्ता होते हुए जौहरी बाजार पहुंची। परिक्रमा रात्रि 10 बजे गोपालजी का रास्ता स्थित निज मंदिर श्री गोपालजी महाराज पहुंचकर सम्पन्न हुई।