शांता कुमार ने वीरवार काे एक बयान में कहा कि इस विधेयक के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारतीय जनता पार्टी को बधाई देते हुए कहा कि यह विधेयक लोकतंत्र की रक्षा के लिए अत्यंत आवश्यक है। इस विधेयक के तहत यदि प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या मंत्री भ्रष्टाचार के आरोप में 30 दिन जेल में रहते हैं, तो उन्हें पद से इस्तीफा देना होगा। उन्होंने कहा कि यह कदम राष्ट्रहित में ऐतिहासिक और दूरगामी प्रभाव डालने वाला सिद्ध होगा।
पूर्व मुख्यमंत्री ने आश्चर्य व्यक्त करते हुए कहा कि विपक्षी दलों ने इस विधेयक की प्रतियां फाड़ कर, सदन में हंगामा किया और हर संभव प्रयास कर इसके पारित होने का विरोध किया। उन्होंने सवाल उठाया कि जब यह कानून हर नेता पर समान रूप से लागू होगा, यहां तक कि प्रधानमंत्री पर भी, तो फिर केवल विपक्ष ही क्यों इसका इतना विरोध कर रहा है?
शांता कुमार ने कहा कि देश में राजनीतिक भ्रष्टाचार एक गंभीर समस्या बन चुका है। उन्होंने कहा कि भाजपा ने राजनीति में आदर्श स्थापित करने की दिशा में सदा पहल की है। लालकृष्ण आडवाणी और अमित शाह जैसे नेताओं ने जब उन पर आरोप लगे तो पद छोड़ दिया और तभी वापस लौटे जब न्यायालय से निर्दोष साबित हुए। इसके विपरीत, कुछ विपक्षी नेता जैसे अरविंद केजरीवाल भ्रष्टाचार के मामलों में जेल भी गए फिर भी पद पर बने रहे और जेल से ही सरकार चलाने जैसे मज़ाक लोकतंत्र के साथ किए गए।
शांता कुमार ने कहा कि यह विधेयक देश में राजनीतिक शुचिता और पारदर्शिता लाने के लिए निर्णायक कदम है। उन्होंने कहा कि इस पर अब संसद की संयुक्त समिति विचार करेगी और उम्मीद जताई कि यह विधेयक शीघ्र ही कानून का रूप लेगा। उन्होंने कहा कि भाजपा ने देश में राजनीतिक भ्रष्टाचार के खिलाफ जो यह कदम उठाया है, वह सराहनीय है। मैं प्रधानमंत्री और पार्टी नेतृत्व को इसके लिए हार्दिक बधाई देता हूं।