ओली सरकार के संसद में विश्वास मत नहीं लिए जाने संबंधी रिट पर कोर्ट ने सभी दस्तावेज मंगवाए

Share

सरकार में सहभागी नागरिक उन्मुक्ति पार्टी के द्वारा ओली सरकार को दिए जा रहे समर्थन को वापस लेने के बाद 30 दिन के भीतर प्रधानमंत्री द्वारा संसद में विश्वास का मत नहीं लेने के बाद सुप्रीम कोर्ट में रिट दायर की गई थी। हालांकि 45 दिन के बाद इस पार्टी के तरफ से स्पीकर देवराज घिमिरे को समर्थन जारी रखने का पत्र दुबारा दिया गया।

लेकिन नेपाल के संविधान में इस अवस्था में 30 दिन के भीतर ही प्रतिनिधि सभा में विश्वास का मत लेने का अनिवार्य प्रावधान है। इस रिट याचिका के संबंध में दस्तावेज जमा करने का आदेश देते हुए कोर्ट ने नागरिक उन्मुक्ति पार्टी के द्वारा समर्थन वापस लेने, उनके मंत्री द्वारा इस्तीफा देने और दुबारा समर्थन देने संबंधी सभी दस्तावेज कोर्ट में जमा करने को कहा है।

सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता वीरेंद्र केसी द्वारा दायर रिट याचिका पर यह दूसरी सुनवाई थी। बुधवार को न्यायमूर्ति महेश शर्मा पौडेल और न्यायमूर्ति नृपद्वाज निरौला की पीठ ने संसद सचिवालय को निर्देश दिया कि वह नागरिक उन्मुक्ति पार्टी के द्वारा स्पीकर को सौंप गए सभी पत्र जमा करने का निर्देश दिया है।

इतना ही नहीं सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को भी निर्देश दिया है कि वह नागरिक उनमुक्ति पार्टी के भीतर वैधता और नेतृत्व विवाद के बारे में जो भी विवरण है उसे कोर्ट के जमा करे। याचिकाकर्ता का दावा है कि ओली सरकार से समर्थन वापस लेने का निर्णय पार्टी की संसदीय दल की बैठक से किया गया है जबकि दुबारा समर्थन देने का पत्र पार्टी की अध्यक्ष रंजीता श्रेष्ठ के तरफ से बिना पार्टी की बैठक के ही दिया गया है।

अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि सरकार में नागरिक उन्मुक्ति पार्टी का प्रतिनिधित्व करने वाले मंत्री अरुण कुमार चौधरी का आधिकारिक इस्तीफा पत्र प्रस्तुत किया जाए। सरकार से समर्थन वापसी के साथ ही चौधरी ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था लेकिन अभी तक प्रधानमंत्री के तरफ से उसे स्वीकृत नहीं किया गया है।

स्पीकर देवराज घिमिरे ने भी सरकार को दुबारा समर्थन देने वाले पार्टी के अध्यक्ष के तरफ से दिए गए पत्र पर कोई निर्णय नहीं लिया है। पार्टी अध्यक्ष रंजीता श्रेष्ठ ने संसदीय दल के नेता पद से लालवीर चौधरी को अपदस्थ कर खुद को संसदीय दल का नेता घोषित करते हुए ओली सरकार को दिए जा रहे समर्थन को जारी रखने का पत्र दिया था।