उच्चतम न्यायालय रोहिंग्याओं को लेकर कई याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा है। न्यायालय ने कहा कि क्या रोहिंग्या शरणार्थी का दर्जा पाने के हकदार हैं। अगर वे शरणार्थी का दर्जा पाने के हकदार हैं, तो उन्हें किस तरह की सुरक्षा या सुविधाएं मिलेंगी। न्यायालय ने कहा कि अगर रोहिंग्या शरणार्थी नहीं हैं और वे अवैध प्रवासी हैं, तो केंद्र और राज्य सरकारों की ओर से उन्हें डिपोर्ट करना जायज था।
न्यायालय ने रोहिंग्या से जुड़ी सभी याचिकाओं को तीन हिस्सों में बांटने का आदेश दिया। पहला रोहिंग्याओं से जुड़ा हुआ। दूसरा जिनका संबंध रोहिंग्याओं से नहीं है। तीसरा वे जिनका संबंध दूसरे मामलों से है। न्यायालय ने कहा कि इन याचिकाओं को अलग-अलग करने के बाद हर बुधवार को सुनवाई की जाएगी।
न्यायालय ने 16 मई को रोहिंग्या शरणार्थियों को जबरन म्यांमार डिपोर्ट करते समय उन्हें अंडमान समुद्र में ड्रॉप करने का आरोप लगाने वाले याचिकाकर्ताओं को फटकार लगाते हुए उनसे इसका आधार पूछा था। जस्टिस सूर्यकांत ने याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कॉलिन गोंजाल्वेस से कहा था कि ये सब कौन देख रहा था। कौन रिकॉर्ड कर रहा था। आप इसका सबूत लेकर आइए।