जब एएचटीयू टीम और एनजीओ ने तीनों तस्करों से अलग-अलग पूछताछ की तो पता चला कि तीनों तस्कर मुस्लिम समुदाय से हैं और लड़की हिंदू समुदाय से है। कुछ दिन पहले मोहम्मद फरहान (तस्कर) ने सोशल मीडिया के माध्यम से लड़की से दोस्ती की और उसे अपने प्रेम जाल में फंसाकर शादी का वादा किया और लड़की को इस तरह से प्रेरित किया कि लड़की अपने परिवार को बताए बिना तस्करों के प्रभाव में नेपाल जाने के लिए तैयार हो गई।
पूछताछ के दौरान आगे पता चला कि तीनों तस्करों ने पूरी योजना बनाई थी और लड़की को हाजीपुर से रक्सौल ले कर आए वे उसे रक्सौल से पोखरा (नेपाल) ले जाने की योजना बना रहे थे। काउंसलिंग के दौरान पता चला कि मोहम्मद फरहान, मोहम्मद राजा आलम, मोहम्मद नजरे आलम लड़की को बीरगंज (नेपाल) में एक दोस्त के होटल में ठहराने वाले थे। 2 दिनों के बाद देहरादून जाने की योजना थी।
नाबालिग लड़की के परिवार से संपर्क करने पर पता चला कि लड़की की गुमशुदगी की रिपोर्ट परिवार द्वारा राम कृष्ण नगर पुलिस स्टेशन, पटना में दर्ज कराई गई है। इस तरह, नाबालिग लड़की को टीम द्वारा तस्कर के चंगुल से बचाया गया और तस्करों के मंसूबों को नाकामयाब कर दिया गया। नाबालिग भारतीय लड़की और तीन तस्करों को अग्रतर कार्रवाई के लिए हरैया थाना सौंप दिया गया है।
रेस्क्यू ऑपरेशन में एसएसबी इंस्पेक्टर विकास कुमार, उप निरीक्षक खेमराज, हवलहार अरविंद द्विवेदी महिला सिपाही नीतू कुमार एवं सेतू लक्ष्मी और प्रयास से आरती कुमारी, राज गुप्ता और स्वच्छ रक्सौल संस्था से रणजीत सिंह और साबरा खातून शामिल रहे।