स्कूली छात्राओं ने बताया कि उन्हें रोजाना लंबी यात्रा करके स्कूल पहुंचना पड़ रहा है। बीच में ऐसे नाले हैं जिन्हें पार करते वक्त डर लगा रहता है। अगर वहां से पांव फिसल जाए तो सीधे ब्यास नदी में जा गिरेंगे। जब इन नालों का जलस्तर भी बढ़ जाता है तो फिर स्कूल की छुट्टी करनी पड़ती है। इन्होंने प्रदेश सरकार से मांग उठाई है कि स्प्रेई पुल को जल्द से जल्द बनाया जाए, ताकि इन्हें किसी प्रकार की दिक्कतों का सामना न करना पड़े।
स्थानीय निवासी संजय कुमार ने बताया कि ग्रामीणों ने कई बार अपनी इस समस्या से लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह और प्रदेश सरकार को अवगत करवाया लेकिन अभी तक इसका कोई समाधान नहीं हो पाया है। ग्रामीणों के अनुसार इस पुल के लिए बजट का प्रावधान भी हुआ था, लेकिन बाद में उसका क्या हुआ, इसकी इन्हें भी कोई जानकारी नहीं है। ग्रामीणों ने उम्मीद जताई कि लोक निर्माण मंत्री इनकी इस समस्या को देखते हुए तुरंत प्रभाव से कार्रवाई करेंगे। वहीं लोक निर्माण विभाग के चीफ इंजीनियर एनपीएस चौहान का कहना है कि स्प्रेई में नया पुल बनाने के लिए तीन करोड़ का एस्टीमेट बनाकर सरकार को भेज दिया गया है। सरकार से मंजूरी मिलने के बाद ही आगामी कार्रवाई की जाएगी।