लोपो चक्रवर्ती नामक पेट को दी गई अंतिम विदाई

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सोनारी क्षेत्र में बुधवार को एक ऐसा दृश्य सामने आया जिसने हर किसी की आंखें नम कर दीं। यह दृश्य किसी इंसान की अंतिम यात्रा का नहीं था, बल्कि एक पालतू डॉग ‘लोपो चक्रवर्ती’ की अंतिम विदाई का था, जिसे उसके परिवार ने पूरे हिंदू रीति-रिवाजों के साथ विदा किया। चक्रवर्ती परिवार के लिए लोपो सिर्फ एक डॉग नहीं था, वह उनका बेटा, भाई और परिवार का अभिन्न हिस्सा था।

प्रवीण कुमार चक्रवर्ती और उनका परिवार पिछले आठ वर्षों से लोपो को अपने साथ उसी प्यार से रखे हुए था, जैसे कोई अपने बच्चे को पालता है। उसे सिर्फ नाम नहीं दिया गया, बल्कि परिवार के उपनाम ‘चक्रवर्ती’ से भी नवाज़ा गया। लोपो को इंसानों की तरह दर्जा देकर, उसके साथ वैसा ही व्यवहार किया गया — और उसकी अंतिम यात्रा भी उतनी ही श्रद्धा और सम्मान के साथ निकाली गई।

लोपो की तबीयत पिछले कुछ दिनों से खराब चल रही थी। परिवार ने हर संभव इलाज करवाया, लेकिन बुधवार सुबह उसने आखिरी सांस ली। जैसे ही यह ख़बर मोहल्ले में फैली, वहां शोक की लहर दौड़ गई। परिवार के सदस्य, रिश्तेदार और मोहल्ले के लोग इकट्ठा हुए और लोपो की शव यात्रा सोनारी स्थित फागु बाबा कब्रिस्तान तक पहुंची, जहां उसे विधिवत रूप से दफनाया गया।

इस अंतिम यात्रा में चक्रवर्ती परिवार के साथ-साथ पड़ोसी भी शामिल हुए, और हर किसी की आंखें नम थीं। बेटी इशिता चक्रवर्ती ने गले में रुंधे शब्दों के साथ कहा, “लोपो मेरे लिए सिर्फ एक पालतू जानवर नहीं था, वह मेरा भाई था। आज उसकी मौत ने वैसा ही दर्द दिया, जैसा किसी अपने के जाने से होता है।”

परिवार ने इस अवसर पर यह भी अपील की कि लोग जानवरों को केवल पालतू समझने की बजाय उनके साथ संवेदनशीलता और प्रेम का व्यवहार करें। प्रवीण कुमार चक्रवर्ती ने कहा, “जैसे हम अपने परिवार के किसी सदस्य को प्यार करते हैं, वैसे ही इन मासूम जीवों को भी उतना ही अधिकार है हमारे स्नेह और सम्मान का।