सत्र हंगामेदार रहने के पूरे आसार हैं। विपक्ष वित्तीय संकट, संस्थानों को शिफ्ट करने, कानून-व्यवस्था, नशा तस्करी, बेरोजगारी, अवैध खनन और सरकार की गारंटियों जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरेगा। कांग्रेस सरकार अपने ढाई साल की उपलब्धियां गिनाएगी और केंद्र सरकार की उपेक्षा को लेकर विपक्ष पर पलटवार करेगी। संभावना है कि विपक्ष भाजपा आज पहली बैठक में ही स्थगन प्रस्ताव लाकर आपदा से हुए नुकसान और प्रभावितों को राहत के मुद्दे पर चर्चा की मांग करेगा। भाजपा का आरोप है कि प्रभावितों को राहत राशि अब तक नहीं मिली है।
सत्र की कार्यवाही पहले दिन शोक प्रस्ताव से शुरू होगी और पूर्व विधायक गणेश दत्त भरवाल को श्रद्धांजलि दी जाएगी। इसके बाद प्रश्नकाल और अन्य विधायी कार्य होंगे। भाजपा विधायक लोकेंद्र कुमार निरमण्ड के डोगरी प्राथमिक विद्यालय को डिनोटिफाई करने का मामला नियम 62 के तहत उठाएंगे, जबकि केवल सिंह पठानिया बीपीएल चयन में दी गई छूट पर ध्यानाकर्षण प्रस्ताव लाएंगे। कृषि मंत्री चन्द्र कुमार “हिमाचल प्रदेश कृषि, औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक 2024” को वापिस लेने का प्रस्ताव सदन में पेश करेंगे। भारी बारिश से हुए नुकसान पर भी सदन में चर्चा होने की संभावना है। यह मुद्दा विधायक चन्द्र कुमार, केवल सिंह पठानिया, सुरेश कुमार और नीरज नय्यर नियम 130 के तहत उठाएंगे। जीतराम कटवाल प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने और इसके लिए ठोस नीति बनाने का प्रस्ताव लाएंगे।
विधानसभा सचिवालय को सत्र के लिए कुल 981 प्रश्न मिले हैं, जिनमें 793 तारांकित और 188 अतारांकित प्रश्न शामिल हैं। नियम 62 के तहत 13, नियम 101 के तहत 6 और नियम 130 के तहत 13 सूचनाएं भी प्राप्त हुई हैं। प्रमुख प्रश्नों में प्राकृतिक आपदाओं से नुकसान, प्रभावित परिवारों का पुनर्वास, आपदा प्रबंधन, स्कूलों के विलय, सड़क व पुल निर्माण, विभागों में रिक्त पदों की पूर्ति, युवाओं में नशाखोरी और कर्मचारियों के बकाया भुगतान जैसे विषय शामिल होंगे।
भाजपा विधायक दल ने रविवार देर शाम को शिमला में रणनीति तय की। बैठक की अध्यक्षता नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने की, जिसमें सभी विधायक दल के सदस्य शामिल हुए। बैठक के बाद विधायक रणधीर शर्मा ने कहा कि कांग्रेस सरकार को विधानसभा सत्र के दौरान कटघरे में खड़ा किया जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने आपदा के समय जनता के साथ अन्याय किया, कर्मचारियों की मांगों की अनदेखी की, संस्थानों को बंद कर दिया या उन्हें इधर-उधर शिफ्ट कर दिया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में कानून-व्यवस्था चरमराई हुई है, नशा और अवैध खनन बढ़ रहा है, भ्रष्टाचार और भाई-भतीजावाद आपदा के समय भी हावी रहा। रणधीर शर्मा ने दावा किया कि केंद्र सरकार ने 7000 करोड़ रुपये से अधिक की राशि हिमाचल को आपदा प्रबंधन के लिए दी, लेकिन राज्य सरकार ने राहत नहीं पहुंचाई। रेल और हवाई अड्डों का विस्तार ठप है और केंद्र विश्वविद्यालय के मुद्दे पर भी न्याय नहीं हुआ। भाजपा ने ऐलान किया है कि मुख्यमंत्री और मंत्रियों से हर मुद्दे पर जवाब मांगा जाएगा।
इस बीच सत्ताधारी कांग्रेस आज मुख्यमंत्री के सरकारी आवास ओकओवर में अपनी रणनीति तय कर रही है।