भागलपुर में हिरोशिमा दिवस पर संवाद आयोजित

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संचालन करते हुए राहुल ने कहा कि हम हिरोशिमा को इसलिए याद करते हैं कि हमें अपने द्वारा बनाए गए विध्वंस की ताकतों का भान रहे। एक छोटे से परमाणु बम ने जब इतनी तबाही की कि तत्काल एक शहर और उसके बाद लाखों की आबादी परमाणु विकिरण की विभीषिका से वर्षों तक जूझती रही। अगले कई दशकों तक परमाणु विकिरण के कारण आने वाली पीढ़ी विकलांग पैदा होते रहे।

मृदुल सिंह ने अपनी कविता के माध्यम से कहा कि आज पूरी दुनिया हजारों परमाणु और हाइड्रोजन बम की ढेर पर खड़ी है। हम कल्पना भी नहीं कर सकते कि अगर कभी परमाणु युद्ध हुए तो दुनिया का क्या होगा। सच तो यह है कि ये युद्ध के हथियार नहीं बल्कि मानव सभ्यता के विनाश के हथियार हैं।