गुरूजी का निधन एक युग का अवसान : सुदेश

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उन्होंने आदिवासी समाज के सम्मान और अधिकारों की लड़ाई को जिस संकल्प और संघर्ष के साथ लड़ा, हम सभी के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

महतो ने कहा कि मैंने व्यक्तिगत रूप से गुरुजी को नज़दीक से देखा और जाना है। उनसे संवाद करना और आंदोलन के प्रत्येक मोड़ पर उनके अनुभवों से सीखना मेरे राजनीतिक जीवन की अमूल्य धरोहर है। उनका जाना झारखंड के एक युग का अंत है।

महतो ने कहा कि हमलोग छात्र जीवन से झारखंड आंदोलन और आजसू से जुड़ चुके थे। राह अलग होने के बावजूद गुरुजी की आत्मीयता हमेशा कायम रही और मुलाकात होने पर हमेशा उत्साहवर्द्धन करते रहे। झारखंड के भविष्य के लिए वे हमेशा चिंतित रहते थे। झारखंड बनने के बाद वे इसे देश का नंबर एक राज्य के रूप में देखना चाहते थे। उनकी कमी हम सब को हमेशा खलती रहेगी।