कांग्रेस के बस्तर विधायक ने लामकेर छात्रावास का किया निरीक्षण

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निरीक्षण के दौरान छात्रावास की बदहाल स्थिति देखकर विधायक ने गहरी नाराजगी जाहिर की और वहां मौजूद अधीक्षक को फटकार लगाते हुए जल्द सुधार के निर्देश दिए।

निरीक्षण के दाैरान छात्रावास में शौचालयों के दरवाजे टूटे-फूटे पाए गए, जिससे छात्र निजता और स्वच्छता के अधिकार से वंचित हैं। स्नानघर की हालत भी कुछ बेहतर नहीं थी,चारों ओर गंदगी फैली हुई थी, और साफ-सफाई के कोई स्पष्ट इंतजाम नहीं दिखे।

विधायक श्री बघेल ने कहा कि “बच्चों को पढ़ने और रहने के लिए एक स्वच्छ, सुरक्षित और सम्मानजनक माहौल देना राज्य सरकार की जिम्मेदारी है, और यहां यह पूरी तरह नदारद है।

निरीक्षण के दौरान यह भी सामने आया कि कई छात्राएं शिष्यवृत्ति योजना के बारे में अनभिज्ञ थीं । जब विधायक ने अधीक्षक से इस बारे में सवाल किया तो उन्होंने स्पष्ट रूप से किसी “सांवलिया नाम” के व्यक्ति का नाम लिया, जिससे मामले में और भ्रम उत्पन्न हुआ विधायक ने इस बात पर भी कड़ी आपत्ति जताई कि छात्राओं को ऐसी महत्वपूर्ण जानकारी नही देना प्रशासनिक लापरवाही का संकेत है। छात्रावास में विद्युत व्यवस्था की हालत बेहद खराब पाई गई। बच्चों के पढ़ने-लिखने और सोने के कमरों में पर्याप्त रोशनी नहीं थी। कई स्थानों पर ट्यूबलाइट लटकी हुई, स्विच बोर्ड टूटे और बल्बों की संख्या गिनी-चुनी थी। बच्चों ने बताया कि उन्हें अंधेरे में पढ़ने की मजबूरी झेलनी पड़ती है। इस पर विधायक ने छात्रावास अधीक्षक मंतुराम कश्यप को फटकार लगाते हुए तत्काल मरम्मत और रोशनी की व्यवस्था करने के निर्देश दिए।

छात्रावास अधीक्षक मंतुराम कश्यप ने निरीक्षण के दौरान अपनी समस्याएं भी विधायक के सामने रखीं। उन्होंने बताया कि वर्ष 2022 और 2023 में मेंटेनेंस के लिए कोई राशि प्राप्त नहीं हुई, जिससे भवन की मरम्मत, शौचालय की साफ-सफाई, विद्युत उपकरणों की मरम्मत जैसे काम रुक गए हैं। उन्होंने कहा कि कई बार उच्च अधिकारियों को अवगत कराने के बावजूद सिर्फ आश्वासन मिला, पर कोई सहायता नहीं मिली। अधीक्षक ने यह भी बताया कि छात्रावास को नाम-मात्र की बिजली सामग्री दी जाती है, जब वे अधिक बल्ब या ट्यूबलाइट की मांग करते हैं, तो संबंधित अधिकारी देने से साफ इनकार कर देते हैं, इससे व्यवस्था और भी जर्जर हो गई है।

विधायक लखेश्वर बघेल ने अधीक्षक की शिकायताें काे गंभीरता से लेते हुए कहा कि वे इन समस्याओं को शासन स्तर तक पहुंचाएंगे और आवश्यक आर्थिक सहायता तथा संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित कराएंगे उन्होंने साफ किया कि किसी भी छात्रावास में बच्चों की मूलभूत आवश्यकताओं से समझौता नहीं किया जाएगा। छात्रों के उज्जवल भविष्य के लिए उनके रहने और पढ़ने के स्थानों की स्थिति अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्हाेने कहा कि बस्तर के लामकेर छात्रावास की हालत यह संकेत देती है कि जमीनी स्तर पर व्यवस्थाएं अब भी प्रशासनिक उपेक्षा का शिकार हैं।