अप्रैल से अगस्त तक केंद्र से यूरिया की 8.23 एमटी की आपूर्ति
राज्य सरकार द्वारा निरंतर केंद्र सरकार के साथ समन्वय स्थापित कर प्रदेश की मांग अनुसार उर्वरकों की आपूर्ति करवाई जा रही है। राज्य के किसानों को पर्याप्त मात्रा में उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने हेतु खरीफ 2025 में अप्रैल से अगस्त तक भारत सरकार द्वारा आवंटित 8 लाख 82 हजार मैट्रिक टन यूरिया के विरुद्ध अब तक 8 लाख 23 हजार मैट्रिक टन की आपूर्ति की जा चुकी है। अगस्त माह की शेष अवधि में 59 हजार मैट्रिक टन यूरिया की आपूर्ति राज्य सरकार द्वारा कराये जाने की कार्यवाही की जा रही है।
केंद्र से स्वीकृत 4.75 मैट्रिक टन डीएपी के विरुद्ध 3.59 लाख मैट्रिक टन की आपूर्ति
माह अप्रैल से अगस्त तक भारत सरकार द्वारा आवंटित 4 लाख 75 हजार मैट्रिक टन डीएपी के विरुद्ध अब तक 3 लाख 59 मैट्रिक टन डीएपी की आपूर्ति की जा चुकी हैं, शेष 27 हजार मैट्रिक टन डीएपी की आपूर्ति प्रस्तावित है।
प्रदेश में वर्तमान में 1 लाख 86 हजार मैट्रिक टन यूरिया, 1 लाख 20 हजार मैट्रिक टन डीएपी, 0.81 लाख मैट्रिक टन एनपीके एवं 1 लाख 93 हजार मैट्रिक टन एसएसपी उर्वरकों का स्टॉक उपलब्ध है। वर्तमान में गत वर्ष की तुलना में फॉस्फेटिक उर्वरकों का स्टॉक 1 लाख मैट्रिक टन अधिक है एवं आपूर्ति जारी है। यूरिया की लगभग 8000 मैट्रिक व डीएपी की 10 हजार 900 मैट्रिक उर्वरक रेल द्वारा परिवहन में है। केंद्र सरकार की ओर से यूरिया, डीएपी एव अन्य उर्वरकों का राज्यों को माहवार व कंपनीवार आवंटन किया जाता है। राज्य सरकार द्वारा प्राप्त आवंटन एवं जिलों की मांग के अनुसार जिलेवार आपूर्ति योजना तैयार कर प्रदेश में उर्वरकों को वितरण कराया जाता है।
राज्य सरकार किसानों के हितों के लिए प्रतिबद्ध हो कर कार्य कर रही है और यह सुनिश्चित करने हेतु हर संभव प्रयास कर रही है कि खेती-किसानी में किसी प्रकार की बाधा न आए। यूरिया एवं डीएपी की पर्याप्त उपलब्धता के साथ-साथ उनकी उचित कीमत पर आपूर्ति भी सुनिश्चित की जा रही है।
कृषकों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड में अंकित सिफारिश के अनुसार ही उर्वरकों के उपयोग हेतु प्रेरित करने, उर्वरकों का समान रूप से पारदर्शिता के साथ वितरण कराने और उर्वरक वितरण में अनियमित्ता बरतने वाले विक्रेताओं, जमाखोरों और कालाबाजारी करने वालों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई हेतु समस्त जिलाधिकारियों को निर्देशित किया गया है।
विभाग द्वारा समस्त किसानों को समान रूप से उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित किये जाने के लिए कृषकों को पंक्तिबद्ध किया जाकर उर्वरकों का वितरण प्रशासन के सहयोग एवं विभागीय कार्मिकों की देख-रेख में किया जा रहा है। राज्य में सरसों फसल की अग्रिम बुवाई करने वाले जिलों में किसानों द्वारा डीएपी का क्रय कर अग्रिम भण्डारण किया जा रहा है।