वीरेन और गिर्दा दोनों ने दी जनता और समाज के संघर्षों को लेखनी व स्वर

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मुख्य वक्ता दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रो. आशुतोष कुमार ने कहा कि वीरेन और गिर्दा दोनों ने जनता और समाज के संघर्षों को अपनी लेखनी व स्वर से आग, आवेग और दिशा दी। उन्होंने वीरेन की रचनाओं के सौंदर्यबोध और गिर्दा की जनधर्मिता को समान रूप से उम्मीद व विश्वास की प्रेरणा बताया। कहा कि दोनों कवि मनुष्यता के पक्षधर और अन्यायपूर्ण सामाजिक संरचना के विरोधी स्वर थे, इस कारण उनकी रचनाएँ जीवन के कोलाहल से जन्म लेकर समाज में चेतना का संचार करती हैं। आशुतोष ने नैनीताल में गिर्दा की स्मृति को चिरस्थायी बनाने के लिए एक स्मारक स्थापित करने की आवश्यकता भी जताई।

व्याख्यान के बाद अनिल कार्की, दीपक तिरुआ, कुमार मंगलम, भास्कर उप्रेती, सिद्धेश्वर सिंह, डीके शर्मा, डॉ. मनोज आर्य, बल्ली सिंह चीमा, स्वाति मेलकानी, मोहन सिंह रावत, नीरज पांगती, आलोक साह, डॉ. शिव त्रिपाठी, हर्ष काफर, डॉ. भूपेन सिंह, डॉ. संदीप तिवारी, त्रिभुवन फर्त्याल, महेश बवाड़ी, दिनेश उपाध्याय, प्रो. भूपेश कुमार सिंह और मदन मोहन चमोली संहित अनेक कवियों ने काव्यपाठ किया।

समारोह में जन संस्कृति मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष जहूर आलम, इतिहासकार शेखर पाठक, पद्मश्री अनूप साह, विनोद पांडे, अदिति खुराना, गीता साह, जय जोशी, नवीन बेगाना, मनोज कुमार, हरीश राणा, गिरिजा पाठक, दीपा पाठक, मनीषा और जस्सी राम आर्या सहित बड़ी संख्या में बौद्धिक और साहित्यप्रेमियों की उपस्थिति रही।