विशेषज्ञों ने बताया की गाजर घास, त्वचा रोग, एलर्जी दमा जैसी बीमारियों के साथ कृषि भूमि की उर्वरता को भी प्रभावित करती है। यह फसलों की उपज घटाने के अलावा पशुओं के लिए हानिकारक होती है।
कृषि वैज्ञानिक आरती कुजूर ने बताया कि मेक्सिकन बीटल गाजर घास नियंत्रण का एक प्रभावी साधन है। उन्होंने सामुदायिक स्तर पर इसे उखाड़कर नष्ट करने, कम्पोस्ट बनाने और इसके वैकल्पिक उपयोग को अपनाने पर जोर दिया। ग्राम जाबर, मंगरहारा तथा ग्राम जाबरखाड के स्कूल के बच्चों ने सामूहिक रूप से गाजर घास उखाड़कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। साथ ही कृषि विज्ञान केन्द्र परिसर में भी सामूहिक अभियान चलाया गया।
कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. गौरव कांत निगम, अनिल कुमार सोनपाकर, आरती कुजूर, प्रक्षेत्र प्रबंधक अनूप कुमार पाल, कार्यक्रम सहायक देवेन्ह कुमार की उपस्थिति में अभियान में लोगों को जागरूक किया गया कि गाजर घास आस-पास के क्षेत्रों में पनपने न दे। साथ ही सामूहिक प्रयास और जनभागीदारी से गाजर घास के नियंत्रण की दिशा में सकारात्मक परिणाम के साथ दुष्प्रभावों से जल्द ही राहत मिलेगी।