इक्षक : जलमार्गों की सुरक्षा का स्वदेशी प्रहरी

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भारतीय नौसेना की बढ़ती सामरिक क्षमताओं और समुद्री प्रभुत्व को सुदृढ़ करने की दिशा में उस समय एक और मील का पत्थर जुड़ गया, जब स्वदेशी तकनीक से निर्मित आधुनिकतम सर्वेक्षण पोत (एसवीएल) ‘इक्षक’ को आधिकारिक रूप से नौसेना को सौंप दिया गया। ‘इक्षक’ का अर्थ है ‘मार्गदर्शक’ और यह नाम अपने आप में प्रतीकात्मक है क्योंकि इस जहाज का मूल उद्देश्य ही समुद्री मार्गों, नौवहन चैनलों तथा गहरे समुद्री क्षेत्रों का सटीक सर्वेक्षण कर मार्गदर्शन उपलब्ध कराना है। यह पोत भारतीय नौसेना के लिए न केवल सामरिक दृष्टि से बल्कि तकनीकी और औद्योगिक आत्मनिर्भरता की दृष्टि से भी एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। भारतीय नौसेना के लिए युद्धपोत डिजाइन ब्यूरो द्वारा तैयार किया गया यह पोत गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (जीआरएसई) कोलकाता में निर्मित हुआ है। जीआरएसई द्वारा निर्मित यह 802वां जहाज और 113वां युद्धपोत है। इससे पहले इस श्रेणी के दो पोत ‘आईएनएस संध्याक’ और ‘आईएनएस निर्देशक’ क्रमशः दिसंबर 2023 और अक्टूबर 2024 में नौसेना को सौंपे गए थे। चार पोतों की इस श्रृंखला में ‘इक्षक’ तीसरा पोत है जबकि चौथा पोत अगले वर्ष तक नौसेना में सम्मिलित होने की संभावना है।

‘इक्षक’ की नींव 6 अगस्त 2021 को रखी गई थी और इसे 26 नवंबर 2022 को लांच किया गया था। निर्माण से लेकर डिलीवरी तक इस जहाज में 80 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी उपकरणों और सामग्री का उपयोग किया गया है। यह आंकड़ा अपने आप में महत्वपूर्ण है क्योंकि यह दर्शाता है कि भारत अब महत्त्वपूर्ण समुद्री प्लेटफार्मों को विदेशी निर्भरता के बजाय स्वदेशी संसाधनों से निर्मित करने में सक्षम है। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, ‘इक्षक’ की डिलीवरी ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान की दिशा में एक ठोस प्रमाण है। इस पोत के निर्माण में बड़ी संख्या में भारतीय उद्योग, एमएसएमई और स्थानीय आपूर्तिकर्ताओं ने सक्रिय योगदान दिया, जिससे न केवल रक्षा उत्पादन में स्वदेशीकरण को बल मिला बल्कि देश के औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र को भी प्रोत्साहन मिला।

‘इक्षक’ का विस्थापन लगभग 3400 टन है और इसकी कुल लंबाई 110 मीटर है। यह आकार इसे अपनी श्रेणी का सबसे बड़ा सर्वेक्षण पोत बनाता है। यह पोत उन्नत हाइड्रोग्राफिक और समुद्र विज्ञान संबंधी अनुसंधान कार्यों को संपन्न करने के लिए आवश्यक स्थिरता और क्षमता प्रदान करता है। इस पोत का ढ़ांचा आधुनिक एकीकृत निर्माण तकनीक से निर्मित किया गया है, जो मजबूती और टिकाऊपन सुनिश्चित करता है। भारतीय शिपिंग रजिस्टर (आईआरएस) के वर्गीकरण नियमों का पालन करते हुए इसका डिजाइन तैयार किया गया है। ‘इक्षक’ अत्याधुनिक हाइड्रोग्राफिक उपकरणों से सुसज्जित है, जिनमें समुद्र की गहराईयों और तलछट की उच्च गुणवत्ता वाले आंकड़े संकलित कर उनका डिजिटल विश्लेषण करने के लिए डेटा अधिग्रहण और प्रसंस्करण प्रणाली, बिना मानवीय चालक के गहरे पानी में विस्तृत सर्वेक्षण और निगरानी करने में सक्षम स्वायत्त जल वाहन, कठिन जल क्षेत्रों में भी रियल टाइम निगरानी और सर्वेक्षण में मददगार दूर से संचालित वाहन, समुद्री मानचित्रण की सटीकता बढ़ाने हेतु लंबी दूरी की पोजिशनिंग प्रणाली डीजीपीएस, समुद्री तल की संरचना और अवरोधों का विस्तृत डिजिटल चित्र तैयार करने में सहायक डिजिटल साइड-स्कैन सोनार प्रमुख हैं। इन उपकरणों के माध्यम से ‘इक्षक’ बंदरगाहों, तटीय क्षेत्रों और गहरे समुद्री मार्गों का व्यापक सर्वेक्षण कर सकता है। यह नौवहन चैनलों और समुद्री मार्गों के निर्धारण में निर्णायक भूमिका निभाएगा। इसके अतिरिक्त यह जहाज रक्षा और नागरिक उद्देश्यों के लिए समुद्र विज्ञान संबंधी और भू-भौतिकीय आंकड़े भी एकत्र करेगा।

‘इक्षक’ दो समुद्री डीजल इंजनों द्वारा संचालित है। यह 18 नॉट (लगभग 33 किलोमीटर प्रति घंटा) से अधिक की गति प्राप्त कर सकता है। फिक्स्ड-पिच प्रोपेलर के साथ-साथ धनुष और स्टर्न थ्रस्टर्स भी इसमें लगाए गए हैं, जो इसे कम गति पर भी अत्यधिक स्थिरता और सटीक संचालन क्षमता प्रदान करते हैं। यह विशेषता सर्वेक्षण अभियानों के दौरान अत्यंत उपयोगी है क्योंकि ऐसे अभियानों में धीमी और स्थिर गति पर काम करना आवश्यक होता है। ‘इक्षक’ का प्राथमिक उद्देश्य यद्यपि जल सर्वेक्षण और नौवहन चैनलों का निर्धारण है, फिर भी यह पोत बहुआयामी भूमिका निभाने में सक्षम है। यह प्राकृतिक आपदाओं के दौरान राहत सामग्री पहुंचाने, चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने और बचाव कार्यों के लिए अस्पताल जहाज की तरह कार्य कर सकता है, सीमित स्तर पर सैन्य अभियानों में भाग लेने में सक्षम है। यह पोत एक हेलीकॉप्टर ले जाने और उसके संचालन का समर्थन करने में भी सक्षम है। इस प्रकार ‘इक्षक’ केवल सर्वेक्षण पोत ही नहीं बल्कि एक बहुउद्देशीय मंच है, जो भारतीय नौसेना की विविध आवश्यकताओं को पूरा कर सकता है। ‘इक्षक’ भारतीय नौसेना का पहला ऐसा एसवीएल (सर्वे वेसल लार्ज) पोत है, जिसमें महिला अधिकारियों और नाविकों के लिए विशेष आवास की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। यह कदम नौसेना में लैंगिक समानता और समावेशिता की दिशा में एक बड़ा परिवर्तन है। इससे यह संदेश भी जाता है कि नौसेना अब महिला अधिकारियों की बढ़ती भूमिका और योगदान को लेकर गंभीर और प्रतिबद्ध है।

विश्व की सामरिक राजनीति में भारतीय महासागर क्षेत्र अत्यंत महत्त्वपूर्ण है। इस क्षेत्र से होकर विश्व का एक बड़ा हिस्सा समुद्री व्यापार के मार्गों से गुजरता है। ऐसे में नौवहन चैनलों की सटीक जानकारी और समुद्री मार्गों की सुरक्षित निगरानी किसी भी राष्ट्र के लिए अत्यावश्यक है। ‘इक्षक’ जैसे उन्नत सर्वेक्षण पोत की उपस्थिति से भारत की समुद्री निगरानी और सर्वेक्षण क्षमताएं कई गुना बढ़ जाएंगी। इससे न केवल नौसेना की परिचालन क्षमता मजबूत होगी बल्कि वाणिज्यिक नौवहन और समुद्री सुरक्षा को भी बढ़ावा मिलेगा। गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स और भारतीय नौसेना का संबंध 64 वर्षों से अधिक पुराना है। 1961 में जीआरएसई ने भारतीय नौसेना को पहला स्वदेशी युद्धपोत ‘आईएनएस अजय’ सौंपा था। तब से लेकर अब तक यह शिपयार्ड नौसेना को 75 युद्धपोत सौंप चुका है। ‘इक्षक’ इस दीर्घकालिक साझेदारी का नवीनतम उदाहरण है। वर्तमान में जीआरएसई नौसेना के लिए 14 और युद्धपोतों का निर्माण कर रहा है, जिनमें दो पी-17ए उन्नत निर्देशित मिसाइल फ्रिगेट, सात पनडुब्बी रोधी उथले जल पोत, चार अगली पीढ़ी के अपतटीय गश्ती पोत और एक अन्य एसवीएल शामिल हैं।

‘इक्षक’ की उपलब्धि भारत के रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। विदेशी तकनीक और आयात पर निर्भरता कम कर स्वदेशी उद्योगों की क्षमताओं का उपयोग करना भारत की रणनीतिक प्राथमिकता है। इस पोत का 80 प्रतिशत से अधिक भाग स्वदेशी तकनीक और उपकरणों से निर्मित है, जो यह दर्शाता है कि भारत अब बड़े समुद्री प्लेटफार्मों को डिजाइन और निर्माण करने में सक्षम हो चुका है।

कुल मिलाकर, भारतीय नौसेना के बेड़े में ‘इक्षक’ का सम्मिलन केवल एक और जहाज जुड़ने की घटना नहीं है बल्कि यह भारत की सामरिक, औद्योगिक और तकनीकी प्रगति का जीवंत उदाहरण है। यह पोत भारतीय महासागर क्षेत्र में नौसेना की सर्वेक्षण क्षमता को अभूतपूर्व स्तर तक ले जाएगा, साथ ही वाणिज्यिक नौवहन और आपदा राहत अभियानों में भी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। ‘इक्षक’ का स्वदेशी निर्माण, उन्नत तकनीकी क्षमताएं, महिला अधिकारियों के लिए विशेष प्रावधान और बहुआयामी उपयोग इसे न केवल भारतीय नौसेना के लिए बल्कि पूरे राष्ट्र के लिए गर्व का विषय बनाते हैं। आने वाले वर्षों में यह पोत भारतीय नौसेना की समुद्री शक्ति, आत्मनिर्भरता और वैश्विक प्रतिष्ठा को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में सहायक सिद्ध होगा।

(लेखक, स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं।)