प्राचार्य सत्यवान मलिक ने कहा कि यह आयोजन हमें सिखाता है कि छोटे-छोटे प्रयास भी बड़े बदलाव ला सकते हैं। वर्मीकम्पोस्ट से मिट्टी की उर्वरता बढ़ाना, बेस्ट आउट ऑफ वेस्ट से अनुपयोगी वस्तुओं को उपयोगी बनाना और हर्बल पौधों से वायु शोधन एवं प्रदूषण नियंत्रण, यह सभी हमें याद दिलाते हैं कि प्रकृति के साथ संतुलन बना कर ही हम आने वाली पीढिय़ों को एक स्वस्थ और स्वच्छ धरती दे सकते हैं।
इस मौके पर पोस्टर मेकिंग कंपटीशन में खुशी बीए द्वितीय वर्ष ने प्रथम स्थान, पूनम बीए तृतीय वर्ष ने द्वितीय स्थान तथा प्रिंस बीए प्रथम वर्ष ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। क्विज कंपटीशन में कुनाल और कैलाश बीएससी प्रथम वर्ष ने प्रथम स्थान, सुकांत और अखिल बीए तृतीय वर्ष ने द्वितीय स्थान और दक्ष और दीपांशु बीएससी प्रथम वर्ष ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। प्रतियोगिताओं के विजेताओं को क्रमश: तीन, दो व एक हजार रुपये का नगद पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया।
नोडल अधिकारी डा. मंजीत श्योकंद ने स्टॉलों की विशेषताओं का विवरण देते हुए बताया कि हरियाणवी संस्कृति वाले स्टॉल पर पारंपरिक परिधान और आभूषण प्रदर्शित किए गए। वर्मी कम्पोस्ट स्टॉल में जैव उर्वरक निर्माण की प्रक्रिया समझाई। बेस्ट आउट ऑफ वेस्ट स्टॉलों पर विद्यार्थियों ने अनुपयोगी वस्तुओं से सजावटी व उपयोगी सामग्री बनाकर पर्यावरणीय संदेश दिया। पर्यावरण प्रदूषण और कानूनों पर प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता ने छात्रों को गहरी जानकारी दी। ग्लोबल वार्मिंग और जैव विविधता संरक्षण पर पोस्टर प्रतियोगिता ने उनकी रचनात्मकता को सामने लाया।