इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य अधिगम (लर्निंग) के सिद्धांतों, शिक्षा में सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) का उपयोग, शिक्षक-निर्देशित अधिगम (टीडीएल) और विद्यार्थी-निर्देशित अधिगम (एलडीएल) में इसकी भूमिका, सामग्री विकास में बौद्धिक संपदा अधिकार (आईपीआर) का महत्व, कॉपीराइट एवं साहित्यिक चोरी से जुड़ी चुनौतियां तथा मुक्त शैक्षिक संसाधनों (ओईआर) की उपयोगिता पर गहन जानकारी प्रदान करना है।
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. आनंद भालेराव ने कहा कि डिजिटल युग में प्रौद्योगिकी-सक्षम शिक्षा उच्च शिक्षा की अनिवार्यता है। आईसीटी का समावेश शिक्षण को प्रभावी और समावेशी बनाता है तथा विद्यार्थियों को भविष्य के लिए तैयार करता है। राजस्थान केंद्रीय विश्वविद्यालय ऐसे कार्यक्रमों के माध्यम से शिक्षकों को नवाचारपूर्ण उपकरण अपनाने के लिए प्रेरित कर रहा है, जिससे विश्वविद्यालय को उत्कृष्टता और नवाचार का केंद्र बनाया जा सके।
आयोजन सत्र की अध्यक्षता करते हुए स्कूल ऑफ मैथमेटिक्स, स्टैटिसटिक्स एंड कम्प्यूटेशनल साइंसेज की डीन प्रो. ममता रानी ने कहा कि कुलपति प्रो. आनंद भालेराव के दूरदर्शी नेतृत्व में विश्वविद्यालय निरंतर प्रगति कर रहा है। उन्होंने शिक्षण में आईसीटी और नए उपकरणों को अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया।